जंगली फल के बीज खाने से मांझी समाज के 11 बच्चों की तबीयत बिगड़ी

बेन (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के बेन प्रखंड के नोहसा गांव में एक दुखद घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गांव के दक्षिणी खंधे में स्थित एक बगीचे में खेल रहे मांझी समाज के 11 बच्चों ने एक जंगली पेड़ के फल के बीज खा लिए, जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं और उन पर बेहोशी छाने लगी। इस घटना ने आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
जानकारी के अनुसार नोहसा गांव के बच्चे दोपहर के समय खंधे में लगे पेड़ों के नीचे खेल रहे थे। खेल के दौरान कुछ बच्चों की नजर एक जंगली पेड़ पर लगे आकर्षक फलों पर पड़ी। उत्सुकता और अनजाने में बच्चों ने इन फलों को तोड़ लिया और उनके बीजों को बेदाम (जंगली बादाम) समझकर खा लिया। कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं और उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों को जैसे ही इसकी सूचना मिली, उन्होंने तुरंत बच्चों को बेन अस्पताल पहुंचाया।
बेन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बिहारशरीफ रेफर कर दिया। बीमार बच्चों में मिथुन कुमार, सन्नी कुमार, चंदन कुमार, तूफान, सुल्तान, संजीव, कुंदन, राजेश, भोला, शंकर, अर्जुन और धोनी शामिल हैं। ये सभी बच्चे 10 से 14 वर्ष की आयु के हैं और मांझी समाज से ताल्लुक रखते हैं।
इस घटना ने नोहसा गांव और आसपास के इलाकों में दहशत फैला दी। परिजनों और ग्रामीणों में इस बात को लेकर चिंता व्याप्त है कि जंगली फल के बीज इतने जहरीले हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह के जंगली पेड़ क्षेत्र में कई जगहों पर मौजूद हैं और बच्चे अक्सर खेलते समय इनके संपर्क में आ जाते हैं। इस घटना ने जंगली पौधों और उनके खतरों के प्रति जागरूकता की कमी को भी उजागर किया है।
सदर अस्पताल बिहारशरीफ में भर्ती बच्चों का इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों ने जिस फल के बीज खाए, वे संभवतः जहरीले थे। जिसके कारण विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) की स्थिति उत्पन्न हुई।
अस्पताल में बच्चों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और उनका उपचार गहन निगरानी में किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन पूर्ण स्वस्थ होने में कुछ समय लग सकता है।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन ने भी त्वरित कार्रवाई की। बेन थाना की पुलिस और स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी।
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे बच्चों को जंगली पेड़ पौधों से दूर रखें और किसी भी अज्ञात फल या बीज का सेवन करने से बचें। इसके साथ ही क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना न केवल एक त्रासदी है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता की कमी को भी दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों और समुदायों में बच्चों को जंगली पौधों, फलों और उनके संभावित खतरों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है।
मांझी समाज के लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। वे अक्सर ऐसी जानकारी से वंचित रह जाते हैं। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों के लिए एक सबक की तरह काम किया है कि ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान को और प्रभावी करना होगा।
बच्चों के परिजनों का कहना है कि वे इस घटना से पूरी तरह स्तब्ध हैं। हमारे बच्चे रोज उस बगीचे में खेलने जाते थे। हमें नहीं पता था कि वहां के फल इतने खतरनाक हो सकते हैं। अब हम चाहते हैं कि प्रशासन इस तरह के पेड़ों को हटाए या कम से कम लोगों को इसके बारे में जागरूक करे।





