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    15 वर्षों से लंबित प्रोन्नति लाभ की माँग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे 300 कृषि वैज्ञानिक

    “वैज्ञानिकों की मांग है कि विगत 15 वर्षों से जो प्रोन्नति की प्रक्रिया बाधित है, उसे नियमानुसार अविलंब लागू कर उसका लाभ दिया जाए...

    इसलामपुर (नालंदा दर्पण)।  इसलामपुर पान अनुसंधान केंद्र के प्रभारी एसएन दास ने बताया कि बिहार के इकलौता राज्य कृषि विश्वविद्यालय में विगत 15 वर्षों से लम्बित प्रोन्नति के माँग को लेकर आज लगातार दूसरे दिन भी विश्वविद्यालय मुख्यालय सहित सभी छह कृषि / उद्यान महाविद्यालय एवं सभी अनुसंधान संस्थान के 300 से अधिक वैज्ञानिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

    उन्होने बताया कि वैज्ञानिकों के आंदोलन का यह तीसरा चरण है। प्रथम दो चरणों में सभी वैज्ञानिकों द्वारा 21 एवं 22 अक्टूबर को काला फीता लगाकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। उसके बाद 25 एव 26 अक्टूबर को कलमबन्द हड़ताल पर गये थे।

    उन्होंने बताया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, प्रदेश का इकलौता व अकेला कृषि विश्वविद्यालय है, जो राज्य के कृषि रो़डमैप को धरातल पर कार्यान्वित कर रहा है। लगातार नए शोध, नई तकनीक एवं नीति के माध्यम से यह विश्वविद्यालय प्रदेश के किसानों एवं विद्यार्थियों को लाभान्वित कर रहा हैं।

    लेकिन दुर्भाग्य है कि जिन वैज्ञानिकों के बदौलत विश्वविद्यालय लगातार कृषि के क्षेत्र में नित्य नए आयाम को प्राप्त कर बुलंदियों को छू रहा है और प्रदेश का नाम देश विदेश में ऊँचाई दिलाने में सहयोग कर रहा है। वहीं वैज्ञानिक आज अपने न्यूनतम अधिकार प्रोन्नति के लिए आंदोलन एवं भूख हड़ताल करने पर मजबूर हैं।

    वैज्ञानिकों के चरणबद्ध आंदोलन के तीसरे चरण में आज भूख हड़ताल के दूसरे दिन भागलपुर विधानसभा के विधायक अजीत शर्मा स्वयं विश्वविद्यालय सबौर के प्रांगण में जाकर शिक्षकों की समस्याओं को जानने-समझने के लिए उनके आंदोलन स्थल के पंडाल में पहुँचे।

    इस दौरान शिक्षक संघ और बिहार कृषि विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सचिव डॉ. अभय मानकर और डॉ. हिदायतुल्लाह मीर ने विस्तार से विधायक को वैज्ञानिकों की वेदना एवं समय पर प्रोन्नति नहीं मिलने के कारण को विस्तार से अवगत करवाया।

    इस मौके पर विधायक ने प्रोन्नति नहीं मिलने से वैज्ञानिकों के कैरियर में हो रहे नुकसान पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार जैसे कृषि प्रधान प्रदेश में जहां इन वैज्ञानिकों के बदौलत हमारे किसान कृषि उत्पादन के क्षेत्र मेंं समृद्ध हो रहे हैं। उन वैज्ञानिकों को समय पर प्रोन्नति नहीं दिया जाना दुर्भाग्य की बात है।

    उन्होंने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी मांग शत प्रतिशत जायज है और क्षेत्रीय विधायक के नाते आपके मांग का पुरजोर समर्थन करते हैं।और इसे पुरा कराने के लिए वे मुख्यमंत्री के पास स्वयं जाकर सारी बात रखेंगे। साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर एवं कृषि विभाग, बिहार सरकार के संबंधित पदाधिकारियों से भी बात करेंगे।

    उन्होनें अपने संबोधन में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी कार्यरत कर्मीयों को जब तक कालबद्ध प्रोन्नति नहीं दिया जाएगा। तब तक उनसे गुणवता युक्त सेवा की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।

    भूख हड़ताल आंदोलन के अंतिम बेला में सायंकाल सभी वैज्ञानिक सामूहिक रूप से कैंडिल मार्च में शामिल हुए और शैक्षिणक एवं प्रशासनिक परिसर के साथ-साथ कतार में आवासीय परिसर का भ्रमण किया।

    इस हड़ताल में शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. रामबालक प्रसाद निराला, डॉ. राकेश देव रंजन, डॉ. वाई. के सिंह, डॉ. शशिकांत, डॉ. अरूण कुमार झा, डॉ. मीरा कुमारी, डॉ. अजय भारद्वाज, डॉ. कुमारी रश्मि सहाय, डॉ. धर्मशिला ठाकुर, डॉ. श्रीधर पाटिल, डॉ. शशांक त्यागी, डॉ. मंकेश कुमार, डॉ. रविरंजन कुमार, डॉ. आनन्द कुमार, डॉ. तमोघ्ना साहा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दीपक बर्णवाल के साथ-साथ सौ से अधिक वैज्ञानिक इस आंदोलन में शामिल थे।

    इसी तरह के कार्यक्रम में इसलामपुर पान अनुसंधान केंद्र में नुरसराय महाविधालय के वैज्ञानिक डॉ. महेश, डॉ. विनय, डॉ. सुनिल, डॉ. मनीकांत, डॉ.मनीषदत ओझा, डॉ.शशीकांत, डॉ. शशीवाला, डॉ.सरदार सुनील सिंह, डॉ.महेंद्र पाल, डॉ.प्रभात कुमार आदि लोग शामिल हुए।

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