नगरनौसा में जल संकट: ग्रामीणों ने NH-431 जाम कर किया आगजनी

नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। नगरनौसा गांव के वार्ड संख्या-3 और वार्ड संख्या-11 में पिछले एक महीने से अधिक समय से पेयजल आपूर्ति ठप होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने शुक्रवार को चंडी-दनियावां मुख्य मार्ग (NH-431) पर आगजनी कर सड़क जाम कर दी। इस प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन के सामने जल संकट की गंभीरता को उजागर किया है।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों- अरुण कुमार, धर्मेंद्र पासवान, विश्वानंद यादव, लालबाबू यादव, गौरव ठाकुर, बीड़ी यादव, राजीव राम, इंद्र यादव, जयनंदन पासवान, सूरज पासवान और अन्य ने बताया कि एक महीने से पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित है। उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से बार-बार शिकायत की। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

ग्रामीणों ने बताया कि वार्ड में एक भी चापाकल नहीं है, जिससे जल संकट और गहरा गया है। कुछ समर्थ लोग अपने घरों में बोरिंग करा चुके हैं। लेकिन गरीब परिवारों को पानी के लिए दूसरों के घरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जिनके पास पानी मांगने जाते हैं, वे दो-चार बातें सुनाकर ही पानी देते हैं। वे हमारी मजबूरी का फायदा उठाते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पेयजल आपूर्ति की समस्या को लेकर न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इस वजह से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।

नतीजतन आज शुक्रवार को गुस्साए ग्रामीणों ने NH-431 पर टायर जलाकर और सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और तत्काल पानी आपूर्ति बहाल करने की मांग की।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रेम राज ने बताया कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के अभियंता को तत्काल पानी आपूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी मिल चुके हैं। लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं आया।

बता दें कि नगरनौसा में जल संकट केवल इन दो वार्डों तक सीमित नहीं है। आसपास के कई गांवों में भी पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में कमी, अवैज्ञानिक जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की कमी इस संकट के प्रमुख कारण हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार न केवल तात्कालिक समाधान प्रदान करे, बल्कि दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम करे। जैसे कि चापाकल स्थापना, जल संरक्षण परियोजनाएं, नियमित पाइपलाइन और बिजली आपूर्ति।

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