Home Guard Recruitment Exam: विभीषण बना शिशुपाल, पहुंचा लाल कोठी!

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में होमगार्ड भर्ती परीक्षा (Home Guard Recruitment Exam) के दौरान एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जिसने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दीपनगर स्थित स्टेडियम में चल रही दक्षता परीक्षा के दौरान एक युवक को फर्जी दस्तावेजों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। वह युवक पहले ही एक बार परीक्षा दे चुका था और अब दूसरी बार नए नाम और फर्जी पहचान पत्र के साथ दोबारा परीक्षा देने पहुंचा था।

गिरफ्तार युवक की पहचान मनीचक गांव निवासी अनिल पासवान के पुत्र शिशुपाल कुमार उर्फ विभीषण कुमार (उम्र 21 वर्ष) के रूप में हुई है। उसने खुद स्वीकार किया कि वह 31 मई को ‘शिशुपाल कुमार’ के नाम से परीक्षा दे चुका है, और अब 4 जून को ‘विभीषण कुमार’ के नाम से पुनः परीक्षा देने आया था, ताकि पहले से बेहतर अंक अर्जित कर बहाली सुनिश्चित कर सके।

दरअसल, परीक्षा केंद्र पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी (मलेरिया निरीक्षक) की सतर्क निगाहों ने इस धोखाधड़ी को भांप लिया। दस्तावेजों की जांच के दौरान जब अभ्यर्थी की पहचान में गड़बड़ी नजर आई, तो तत्काल उसे हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ में युवक ने पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया।

युवक के पास से फर्जी आधार कार्ड और प्रवेश पत्र बरामद किए गए हैं, जो ‘विभीषण कुमार’ के नाम से बनाए गए थे। प्रारंभिक जांच में यह आधार कार्ड पूरी तरह नकली पाए गए हैं। युवक ने कबूला कि वह हमेशा दो अलग-अलग नामों से आवेदन करता है ताकि एक ही भर्ती प्रक्रिया में दो बार किस्मत आजमा सके।

घटना की सूचना मिलते ही दंडाधिकारी ने दीपनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट सक्रिय है, जो अभ्यर्थियों को फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद करता है।

बहलहाल, इस घटना ने होमगार्ड भर्ती परीक्षा की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यदि दंडाधिकारी की सतर्कता नहीं होती, तो यह फर्जी अभ्यर्थी परीक्षा पास कर बहाली भी पा सकता था।

क्या कहता है कानून? धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करना, और परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को जेल और आर्थिक जुर्माने दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

इस प्रकरण ने न केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

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