ऑनलाइन हाज़िरी में नालंदा फिसड्डी! सिर्फ 3.15% एंट्री पर शिक्षा विभाग सख्त

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के सरकारी विद्यालयों में अब शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल ट्रैक पर दौड़ने को तैयार है। शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति के बाद अब छात्र-छात्राओं की हाज़िरी भी तकनीक के जरिए दर्ज की जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसे अनिवार्य करते हुए साफ संकेत दे दिया है कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी।

इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा अभियान) मो. शाहनवाज ने जिले के सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है।

पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार के निर्देशों के आलोक में फरवरी 2026 से सभी सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति टैबलेट के माध्यम से इ-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

टैबलेट और प्रशिक्षण पहले ही उपलब्ध

डीपीओ एसएसए ने स्पष्ट किया है कि इस नई व्यवस्था के लिए विद्यालयों को पहले ही पर्याप्त संख्या में टैबलेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रधानाध्यापकों और नामित शिक्षकों को टैबलेट के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। ताकि तकनीकी अड़चन का कोई बहाना न रहे।

सिर्फ 3.15% ऑनलाइन उपस्थिति, विभाग नाराज़

हालांकि, विभाग के लिए चिंता की बात यह है कि वर्तमान में जिले में केवल 3.15 प्रतिशत छात्र उपस्थिति ही टैबलेट के माध्यम से इ-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज की जा रही है। इसे डीपीओ ने अत्यंत खेदजनक और चिंताजनक बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह स्थिति विभागीय निर्देशों की अवहेलना मानी जाएगी।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि वे अविलंब अपने-अपने विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करें। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर व्यवस्था को लागू नहीं किया गया, तो इसके लिए संबंधित प्रधानाध्यापक को पूरी तरह जिम्मेदार माना जाएगा और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर बड़ा कदम

शिक्षा विभाग का मानना है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने से न सिर्फ विद्यार्थियों की वास्तविक मौजूदगी पर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि फर्जी नामांकन, अनुपस्थिति और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त ढिलाई पर भी प्रभावी नियंत्रण होगा। इससे स्कूलों की जवाबदेही बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

कुल मिलाकर नालंदा के सरकारी विद्यालयों में यह कदम शिक्षा के डिजिटल भविष्य की ओर एक मजबूत पहल माना जा रहा है। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर इस आदेश का पालन कितनी गंभीरता से होता है और क्या यह बदलाव बच्चों की पढ़ाई में वास्तविक सुधार ला पाता है या नहीं।

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