लोकायन नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से लोग परेशान, फसलों को भारी नुकसान
हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा प्रखंड क्षेत्र में लोकायन नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। धुरी बिगहा गांव के समीप लोकायन नदी के पश्चिमी तटबंध में करीब 60 फीट और भुतही नदी के पूर्वी तटबंध में आंकोपुर गांव के पास करीब 30 फीट का कटाव हो गया है।
इसके अलावा हसनपुर मड़वा गांव के पास मछली तालाब के निकट तीन तटबंध टूटने से मड़वा, हसनपुर और हरबसपुर गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इससे दर्जनों गांव पिछले तीन दिनों से बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे खेतों में लगी फसलें जलमग्न हो गई हैं और महादलित टोले में कई घरों में पानी घुस गया है।
बाढ़ के कारण हसनपुर, हरबसपुर और मड़वा गांवों में हड़कंप मच गया है। खेतों में लगी फसलों के अलावा गांवों में पानी भरने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में कोई ठोस राहत कार्य नहीं पहुंचा है। बिजली आपूर्ति ठप होने से रात में मच्छरों और कीड़े-मकोड़ों की संख्या बढ़ गई है, जिससे सांप-बिच्छू का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी सुध लेने की कोई कोशिश नहीं की।
धुरी बिगहा, छियासठ बिगहा, फुलवरिया, लक्कड़ बीघा, कुसेता, डोमना बिगहा, मुरलीगढ़, सोहरापुर, हसनपुर, हरबसपुर और मड़वा के खेतों में चार फीट तक पानी बह रहा है। सैकड़ों एकड़ में लगी धान, मूंग और अन्य फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। बाढ़ का पानी जमुआरा, चमंडी, दामोदरपुर, रसलपुर, गिलानीपुर, बेलदारी बिगहा, हरिहर खंधा, चिकसौरा, मिर्जापुर, मराची और लुच्चन टोला जैसे नए इलाकों में भी फैल गया है। बेलदारी बिगहा के पास सड़क पर तेज बहाव के कारण चिकसौरा पंचायत के कई गांवों में पानी का लेवल तेजी से बढ़ रहा है।
प्रशासन की ओर से कई गांवों में अभी तक लंच पैकेट जैसी बुनियादी राहत सामग्री भी नहीं पहुंची है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। सोहरापुर गांव में सामुदायिक भोजनालय बंद कर दिया गया, जिसे बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन की लापरवाही का प्रतीक माना। सीओ मो. इकबाल अहमद ने बताया कि नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा है, लेकिन यह अभी खतरे के निशान से नीचे है। प्रशासन टूटे तटबंधों की मरम्मत के लिए तेजी से काम कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई भी तटबंध पूरी तरह ठीक नहीं हो सका।
नालंदा के सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने बाढ़ प्रभावित पश्चिमी इलाकों का दौरा किया और फसलों के नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी से बात कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। साथ ही टूटे तटबंधों की मरम्मत तेज करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेरमा छिलका से राहिल छिलका तक बोल्डर पिचिंग का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।





