Home करायपरशुराय कमरथू में सामुदायिक भोजनालय का बहिष्कार, प्रशासन के खिलाफ आक्रोश

कमरथू में सामुदायिक भोजनालय का बहिष्कार, प्रशासन के खिलाफ आक्रोश

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कमरथू में सामुदायिक भोजनालय का बहिष्कार, प्रशासन के खिलाफ आक्रोश
Flood victims boycott community canteen, anger against administration

हिलसा (नालंदा दर्पण)। करायपरसुराय प्रखंड के मकरौता पंचायत अंतर्गत सवचक, खोखना, कमरथू और दीरीपर खंधा में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ के कारण खेत, घर और गलियां जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन संकट में है।

इस बीच कमरथू गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा संचालित सामुदायिक भोजनालय का बहिष्कार शुरू कर दियाहै। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गांव से पानी की निकासी नहीं होती, वे भोजनालय का उपयोग नहीं करेंगे।

कमरथू गांव के निवासियों दीपू कुमार, पंकज कुमार, ब्रह्मदेव पंडित, जगदीश मोची, नाटेशर नट, विजय बिंद और शिवकुमार प्रसाद ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ अपना असंतोष जताया है।

उनका कहना है कि बाढ़ के पानी ने उनके खेतों और घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और 72 घंटे बीत जाने के बावजूद प्रशासन ने जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक भोजनालय केवल दिखावा है, जबकि उनकी मूल समस्या जल निकासी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

दीपू कुमार ने कहा कि हम भोजन नहीं, अपने घरों और खेतों को बचाना चाहते हैं। जब तक पानी की निकासी नहीं होगी, हम भोजनालय से कोई मदद नहीं लेंगे। वहीं ब्रह्मदेव पंडित ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीन दिन से हमारा गांव डूबा हुआ है। न तो कोई अधिकारी स्थिति देखने आया, न ही कोई समाधान हुआ।

वहीं देर रात प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) नंदकिशोर और अंचल अधिकारी मणिकांत कुमार ने कमरथू गांव का दौरा किया। वे अपने साथ भोजन के पैकेट लेकर पहुंचे और ग्रामीणों को बहिष्कार खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की। हालांकि, आक्रोशित ग्रामीणों ने उनकी बात नहीं मानी और विरोध जताते हुए उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे केवल भोजन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहते हैं।

बता दें कि करायपरसुराय प्रखंड के प्रभावित गांवों में बाढ़ का पानी खेतों, घरों और गलियों में भरा हुआ है। सवचक, खोखना, कमरथू और दीरीपर खंधा के निवासियों का कहना है कि जलजमाव के कारण उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। खेतों में फसलें नष्ट हो चुकी हैं और घरों में पानी भरने से सामान खराब हो रहा है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी विजय बिंद ने बताया कि हमारे बच्चे और बुजुर्ग भूखे-प्यासे हैं, लेकिन भोजन से पहले हमें अपने घरों को बचाने की जरूरत है। प्रशासन केवल भोजन बांटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकता। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल जल निकासी के लिए पंप सेट और अन्य उपाय उपलब्ध कराए।

कमरथू गांव के ग्रामीणों का बहिष्कार और आक्रोश प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सामुदायिक भोजनालय का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करना था, लेकिन ग्रामीणों का असंतोष इस बात का संकेत है कि केवल भोजन उपलब्ध कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जलजमाव की समस्या को हल करने के लिए ठोस और त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे अपने विरोध को और तेज करेंगे। प्रशासन के सामने अब यह जिम्मेदारी है कि वह ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से ले और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करे।

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