साधु-संतों ने राजगीर मलमास मेला को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने का लिया संकल्प

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के नालंदा जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर में आयोजित होने वाला राजकीय मलमास मेला अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।अब इस मेले को राष्ट्रीय मेला का दर्जा दिलाने के लिए साधु-संत और महंत समाज ने कमर कस ली है।

इसी क्रम में राजगीर के बड़ी संगत ठाकुरबाड़ी में साधु-संतों और महंतों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न अखाड़ों और मठों से आए संतों ने भाग लिया।

बैठक में संत समाज ने राजगीर मलमास मेले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। संतों ने एक स्वर में कहा कि यह मेला सतयुग काल से चला आ रहा है और इसे विश्व का सबसे प्राचीन मेला माना जाता है। पुरुषोत्तम मास के दौरान एक महीने तक चलने वाले इस मेले में मान्यता है कि 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में प्रवास करते हैं।

यह मेला न केवल हिंदू धर्मावलंबियों के लिए, बल्कि जैन, बौद्ध और अन्य धर्मों के अनुयायियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। राजगीर की 22 पवित्र कुंड और 52 जल धाराएं, विशेष रूप से ब्रह्मकुंड और सप्तधारा, श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं, जहां लाखों लोग स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

बैठक में उपस्थित साधु-संतों ने सर्वसम्मति से मलमास मेले को राष्ट्रीय मेला का दर्जा देने की मांग का समर्थन किया। प्रयागराज के जगद्गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज महाराज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजगीर की धरती सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है। यह मेला राष्ट्रीय मेला के सभी मानकों और शर्तों को पूरा करता है। इसे राष्ट्रीय दर्जा मिलने से न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ेगा।

उन्होंने मेले के दौरान धार्मिक माहौल बनाए रखने पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि मांस, मछली, मीट और मुर्गा की दुकानों को मेला अवधि में मुख्य सड़कों से हटाकर अलग स्थान पर लगाया जाए। ताकि श्रद्धालुओं और संतों की भावनाओं का सम्मान हो।

थिएटर और अश्लील मनोरंजन पर प्रतिबंध की मांगः स्वामी दिलीप योगीराज ने मेले में थिएटर जैसे अश्लील और असंस्कारी मनोरंजन पर रोक लगाने की मांग उठाई।

उन्होंने कहा कि मलमास मेला एक पवित्र धार्मिक आयोजन है। इस दौरान रामलीला और रासलीला जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि मेले की पवित्रता और गरिमा बनी रहे। संत समाज ने इस मांग का समर्थन करते हुए इसे लागू करने के लिए प्रशासन से सहयोग की अपील की।

बैठक में संत समाज ने मलमास मेले को राष्ट्रीय मेला का दर्जा दिलाने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का संकल्प लिया। यह अभियान पूरे देश में चलाया जाएगा। इसमें साधु-संतों, श्रद्धालुओं और आम लोगों से समर्थन मांगा जाएगा।

अभियान के समापन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल नालंदा के जिलाधिकारी, बिहार के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री से मिलकर आधिकारिक तौर पर मांग पत्र सौंपेगा। संतों का मानना है कि यह कदम मेले के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

2026 में दुर्लभ संयोगः जगद्गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य ने बताया कि 2026 में मलमास मेला एक दुर्लभ संयोग के साथ आयोजित होगा, जो 43 लाख वर्षों बाद बन रहा है। इस अवसर पर मेले की भव्यता और आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाने के लिए विशेष तैयारियां की जाएंगी। उन्होंने कुंभ मेले की तर्ज पर साधु-संतों के लिए निःशुल्क शिविरों की व्यवस्था करने की भी मांग की।

बैठक में प्रयागराज के जगद्गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी विवेक मुनी जी महाराज, महंत बाल्मीकि दास, महंत उत्तम दास जी साहेब, महंत सुमन साहेब, महंत मुन्ना दास जी साहेब, महंत भगवान दास जी साहेब, महंत रविंद्र दास जी साहेब, महंत अर्जुन दास जी साहेब, महंत हरिनंदन साहेब, योगगुरु अजय कुमार आर्य, महंत सुखदेव दास, महंत देवेंद्र दास, महंत शिवनंदन दास, महंत राजेंद्र दास, महंत अजय दास, मंजू दासीन, माहेश्वरी दासीन, आचार्य निर्मल द्विवेदी सहित कई अन्य संत और महंत शामिल हुए।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker