बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। शिक्षा विभाग में एक बार फिर से वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नालंदा जिला शिक्षा कार्यालय में पदास्थापित लिपिक फणी मोहन पर बेनामी वाउचर के जरिए सरकारी राशि के दुरुपयोग और संबंधित संचिका जमा न करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में उन्हें एक सप्ताह के भीतर बिंदुवार स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। लिपिक फणी मोहन पहले क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक पटना प्रमंडल कार्यालय में पदास्थापित हैं।
सूत्रों के अनुसार यह मामला तब प्रकाश में आया, जब 17 जुलाई 2025 को पत्रांक 1072 के माध्यम से फणी मोहन को बेनामी वाउचर से संबंधित वस्तुस्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया गया।
हालांकि निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर 25 जुलाई 2025 को पत्रांक 1114 के जरिए पुनः स्पष्टीकरण मांगा गया। फणी मोहन ने अपने जवाब में दावा किया कि तीनों वाउचर (संख्या 26/2023-24, 27/2023-24 और 29/2023-24) न्यायालयीन मामले से असंबंधित हैं।
उन्होंने वाउचर संख्या 26/2023-24 को रामवृच्छ संस्कृत प्राथमिक-सह-मध्य विद्यालय मंडाछ, एकंगरसराय की जांच से जोड़ा। जबकि वाउचर संख्या 27/2023-24 और 29/2023-24 को विभागीय जांच रिपोर्ट और कार्यालयी कार्यों के लिए फोटोकॉपी खर्च से संबंधित बताया। लेकिन इन वाउचर से जुड़ी संचिका प्रभारी लिपिक को सौंपी नहीं गई, जिसके कारण मामले की वास्तविक स्थिति अस्पष्ट रही।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बेनामी वाउचर के माध्यम से सरकारी राशि का गबन किया गया, जो वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन का स्पष्ट संकेत है। इसके अतिरिक्त संचिका जमा न करना कर्तव्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आघात करता है।
मामले को और गंभीरता तब मिली, जब गायत्री देवी तेजस्वी फैन्स एसोसिएशन के सचिव ने 28 जुलाई 2025 को पत्रांक 27 के माध्यम से फणी मोहन पर न्यायालयीन वाउचर की राशि अवैध रूप से लेने का आरोप लगाया। कुल 114 पृष्ठों के इस शिकायत पत्र की प्रति फणी मोहन को भेजी गई है। उन्हें सभी बिंदुओं पर एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। बेनामी वाउचर और संचिका जमा न करने जैसे आरोपों ने न केवल व्यक्तिगत जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, बल्कि विभागीय प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर किया है। सूत्रों के अनुसार यदि फणी मोहन निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब देने में असफल रहते हैं तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
बहरहाल, यह नया घोटाला नालंदा जिले में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हितधारक इस मामले पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की अनियमितताएं शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में विश्वास को कमजोर करती हैं। वहीं कुछ का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच से अन्य अधिकारियों के लिए भी एक सबक होगा।
क्योंकि शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। फणी मोहन के जवाब के आधार पर अगले कदम तय किए जाएंगे। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए वाउचर प्रणाली और संचिका प्रबंधन में सुधार की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।









