नालंदापुलिसबिग ब्रेकिंगहिलसा

उत्पाद थाना खुला तो बढ़ा शराब कारोबार, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू शराबबंदी कानून के बावजूद शराब कारोबारियों में कानून का कोई खौफ नहीं दिखता। भले ही सड़कों पर शराब की दुकानें नजर न आएं, लेकिन शराब हर गली-नाले में आसानी से उपलब्ध है।

हिलसा नगर परिषद क्षेत्र के धर्मपुर गांव में प्राथमिक विद्यालय के आसपास दर्जनों घरों में वर्षों से शराब बनाने का धंधा चल रहा है। सुबह से शाम तक शराब की भट्टियां जलती रहती हैं और होम डिलीवरी के जरिए यह कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है।

धर्मपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के निकट चल रहे इस अवैध धंधे ने न केवल शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, बल्कि वहां पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों के भविष्य और सेहत पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। शराब की गंध और कारोबारियों की हिम्मत ने स्कूल को भी मधुशाला में बदल दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा, जिससे शराब माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए हैं।

शराब कारोबार के खिलाफ ग्रामीणों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों के रोष को देखते हुए हिलसा थाना और उत्पाद थाना की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शराब कारोबारियों के ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया और उन्हें सख्त चेतावनी दी।

हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि हिलसा में उत्पाद थाना खुलने के बाद से शराब का कारोबार और तेजी से बढ़ा है।

ग्रामीण राजकुमार प्रसाद, अखिलेश यादव, संजय यादव, अवधेश प्रसाद, मधुरा प्रसाद, भोला यादव, रामेश्वर मांझी, कैलू गोप, सत्येंद्र प्रसाद, मुकेश कुमार, धनंजय कुमार, दीपक कुमार, गोलू कुमार, मंजुला देवी, संजू देवी, रीना कुमारी और सुनीता देवी ने एक स्वर में कहा कि गांव में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का कारोबार हो रहा है।

उनका कहना है कि उत्पाद थाना शराब कारोबारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनके साथ सांठगांठ कर अवैध कमाई का जरिया बना रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बाद पुलिस की गाड़ियां तो मौके पर पहुंचती हैं, लेकिन शराब कारोबारियों के ठिकानों पर बिना सघन तलाशी लिए ही वापस लौट जाती हैं। इससे शराब माफियाओं के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध धंधे पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। ताकि गांव का माहौल सुधरे और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। अगर जल्द ही इस धंधे पर रोक नहीं लगाई गई तो वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.