डूबे अंडरपास से भड़के ग्रामीणों ने राजगीर-उधमपुर स्पेशल ट्रेन को रोका
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बेना थाना क्षेत्र के इमली बीघा हाल्ट के पास ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए राजगीर-उधमपुर स्पेशल ट्रेन को घंटों तक रोक दिया। यह विरोध प्रदर्शन एक लंबे समय से चली आ रही गंभीर समस्या का परिणाम था, जिसने स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे द्वारा बनाया गया एक नया अंडरपास न केवल तकनीकी रूप से कमजोर है, बल्कि बारिश के मौसम में यह पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है, जिससे उनकी आवाजाही ठप हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे विभाग ने उनके क्षेत्र के पुराने और प्रमुख आवागमन मार्ग को बंद कर एक नया अंडरपास बनाया, जो अब उनकी परेशानियों का सबब बन गया है। यह अंडरपास बारिश के दिनों में पानी से लबालब भर जाता है, जहां 10 से 15 फीट तक पानी जमा हो जाता है।
इस स्थिति में न तो पैदल चलना संभव है और न ही वाहनों का आवागमन। पुराना रास्ता, जो दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा था, अब बंद होने से लोगों का बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
हालांकि ग्रामीणों ने इस समस्या को कई बार रेलवे अधिकारियों के सामने उठाया, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बार-बार की अनदेखी से तंग आकर ग्रामीणों ने आखिरकार विरोध का रास्ता चुना। अहले सुबह सैकड़ों ग्रामीण इमली बीघा हाल्ट पर एकत्र हुए और राजगीर-उधमपुर स्पेशल ट्रेन को रोककर अपना गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया और मांग की कि अंडरपास की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए।
प्रदर्शन में शामिल एक अन्य ग्रामीण सुनीता देवी ने कहा कि हमने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार हमें सिर्फ आश्वासन मिला। अब हम और इंतजार नहीं कर सकते। अगर रेलवे हमारी बात नहीं सुनता, तो हम और बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि अंडरपास का डिजाइन ही दोषपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंडरपास के निर्माण में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण बारिश का पानी जमा हो जाता है। इसके अलावा अंडरपास की ऊंचाई और संरचना भी स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है।
एक स्थानीय इंजीनियर ने बताया कि इस अंडरपास का निर्माण जल्दबाजी में किया गया, बिना यह सोचे कि बारिश के मौसम में इसका क्या हाल होगा। जल निकासी के लिए कोई पंपिंग सिस्टम या वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं है।
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा और जल्द ही अंडरपास की समस्या का समाधान निकाला जाएगा। हालांकि ग्रामीण अब इन आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार ने कहा कि यह सिर्फ एक अंडरपास की समस्या नहीं है, यह ग्रामीणों के मूलभूत अधिकारों का सवाल है। रेलवे और प्रशासन को चाहिए कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और तत्काल इसका समाधान करें।
बहरहाल इमली बीघा के ग्रामीणों का यह विरोध प्रदर्शन न केवल एक स्थानीय समस्या को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विकास के नाम पर बनाई गई परियोजनाओं में अगर स्थानीय लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज किया जाता है तो वह उनके लिए बोझ बन सकती हैं। रेलवे विभाग को चाहिए कि वह इस अंडरपास की तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर करे और ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे।





