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गजब! 53 साल बाद भी किराया के मकान में चल रहा है जिला शिक्षा कार्यालय

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण संवाददाता)। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में 53 वर्ष बाद भी एक अदद जिला शिक्षा कार्यालय नहीं मिल सका हैं। भले ही विकास के मामले में नालंदा जिला कई कीर्तिमान स्थापित किए हों, लेकिन ज्ञान की भूमि नालंदा को अब तक एक शिक्षा भवन तक नहीं मिलना हैंरानी की बात हैं। लगता हैं कि किराये के मकान में संचालित होना जिला शिक्षा कार्यालय की नियति बन गयी हैं।

विगत 53 वर्षों में जिला शिक्षा कार्यालय शहर के कई अलग-अलग किराये के भवनों में संचालित होता रहा हैं। इन भवनों में कई समस्याओं के बावजूद कार्यालय बदस्तूर जारी रहा हैं। शहरवासी बताते हैं कि 90 के दशक तक जिला शिक्षा कार्यालय धनेश्वर घाट स्थित एक छोटे से दो मंजिलें किराए के भवन में संचालित होते रहा था।

इसके बाद शहर के कमरुद्दीनगंज मोहल्ला स्थित जहाजी कोठी में भी कई वर्षों तक जिला शिक्षा कार्यालय संचालित हुआ था। बाद में शहर के मोगल कुआं स्थित जिला परिषद की भवन में भी जिला शिक्षा कार्यालय कई वर्षों तक किराये पर संचालित होते रहा। वहां कई वर्षों तक अधिकारियों तथा कर्मियों को बरामदे में भी बैठकर कामकाज करना पड़ता था।

यहां कई कठिनाइयों को देखते हुए जिला शिक्षा कार्यालय को शहर के गढ़पर स्थित नालंदा कॉलेजिएट प्लस टू विद्यालय के परीक्षा भवन में स्थानांतरित किया गया था। विगत लगभग 5 वर्षों से जिला शिक्षा कार्यालय इसी भवन में संचालित किया जा रहा हैं। इस दौरान कई बार जिला शिक्षा कार्यालय के लिए अपना भवन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी न किसी कारण से हर प्रयास विफल हो गया।

नतीजतन जिले में शिक्षा का प्रकाश फैलाने की जिम्मेदारी उठाने वाला शिक्षा विभाग अब तक अंधेरे में रह गया। अब शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ बी राजेंद्र के द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेज कर जल्द से जल्द भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया हैं। इससे जिले के बुद्धिजीवियों तथा शिक्षा प्रेमियों के साथ-साथ कार्यालय के अधिकारियों व कर्मियों को विभाग का अपना भवन मिलने की उम्मीद बंधी हैं।

विभाग द्वारा लगभग चार वर्ष पहले ही सोगरा स्कूल के निकट जिला शिक्षा कार्यालय के लिए भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी थी। इस शिक्षा भवन का निर्माण 720 वर्ग फुट के क्षेत्र में कराया जाना था। लगभग 4.09 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिला भूकंप रोधी भवन निर्माण की जिम्मेदारी बिहार आधारभूत शैक्षणिक संरचना निर्माण निगम लिमिटेड को दी गयी थी।

यहां निर्माण एजेंसी को विभाग द्वारा लगभग चार कट्ठा भूमि उपलब्ध करायी गयी थी। इस भूमि पर पूर्व से जिला शिक्षा कार्यालय की एक शाखा हाल तक संचालित थी। हालांकि इस भूमि पर किसी कारणवश निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो सका हैं और अब विभाग को नई भूमि तलाशनी पड़ रही हैं।

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