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राजगीर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: अब आधुनिक उड़ानों से जुड़ेगी बिहार की प्राचीन धरोहर

राजगीर (नालंदा दर्पण ब्यूरो)। बिहार की ऐतिहासिक भूमि राजगीर, जहां कभी भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय ने दुनिया को शिक्षा का प्रकाश दिया, अब एक नई क्रांति की दहलीज पर खड़ी है। यहां बन रहा राजगीर इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए द्वार खोलेगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है और हालिया अपडेट्स से पता चलता है कि प्रोजेक्ट अपनी समयसीमा से आगे चल रहा है।

यह एयरपोर्ट सिलाव के निकट 1,200 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जो नालंदा विश्वविद्यालय और इंटरनेशनल राजगीर स्टेडियम से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की टीम ने फरवरी 2025 में यहां ऑब्स्ट्रक्शन लिमिटेशन सर्वे (ओएलएस) पूरा किया था और अब रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग तथा अन्य सुविधाओं का निर्माण जोरों पर है।

अधिकारियों का कहना है कि यह एयरपोर्ट शुरू में घरेलू उड़ानों के लिए तैयार होगा, लेकिन जल्द ही इंटरनेशनल स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा, जिससे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के अलावा सिंगापुर, थाईलैंड और जापान जैसे देशों से सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव: राजगीर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, गर्म पानी के कुंडों और जैन-बौद्ध धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। अब दुनिया भर के पर्यटकों के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगा।

पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह एयरपोर्ट राजगीर को ग्लोबल टूरिज्म हब बना देगा। यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में 50% से अधिक की वृद्धि की उम्मीद है, जो स्थानीय होटल, रेस्तरां और हस्तशिल्प उद्योग को बूस्ट देगी।

इसके अलावा एयरपोर्ट के निर्माण से ही हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है और पूरा होने पर यह क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करेगा। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में राजगीर में आयोजित होने वाले भारत-न्यूजीलैंड रग्बी मैचों की मेजबानी भी इसी इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण संभव हो रही है, जो एयरपोर्ट के साथ मिलकर खेल पर्यटन को बढ़ावा देगी।

चुनौतियां और समाधान: हालांकि प्रोजेक्ट में कुछ पर्यावरणीय चुनौतियां भी सामने आई हैं। राजगीर हिल्स, जो यूरोप और मध्य एशिया से आने वाले प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना है, के निकट होने के कारण निर्माण में पक्षी-संरक्षण के उपाय अपनाए जा रहे हैं।

दिसंबर 2025 के सर्वे में यहां 135 प्रजातियों के पक्षी पाए गए थे, जिनमें 33 प्रवासी थे। एएआई ने आश्वासन दिया है कि एयरपोर्ट का डिजाइन पर्यावरण-अनुकूल होगा, जिसमें पक्षी-रडार सिस्टम और ग्रीन बेल्ट शामिल हैं।

भविष्य की संभावनाएं: बिहार सरकार की योजना के अनुसार राज्य में 200 किलोमीटर के दायरे में एक एयरपोर्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राजगीर के अलावा भागलपुर और सोनेपुर में भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।

पटना के बिहटा एयरपोर्ट के साथ मिलकर ये प्रोजेक्ट्स बिहार को पूर्वी भारत का प्रमुख एविएशन हब बना देंगे। स्थानीय निवासी उत्साहित हैं। एक किसान ने कहा कि यह एयरपोर्ट हमारे गांव को दुनिया से जोड़ेगा, अब हमारे बच्चे बड़े शहरों में नौकरी के लिए आसानी से जा सकेंगे।

बहरहाल राजगीर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट यह विकास न केवल बिहार की प्रगति का प्रतीक है, बल्कि प्राचीन इतिहास और आधुनिक तकनीक के संगम का उदाहरण भी। राजगीर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ बिहार की उड़ान नई ऊंचाइयों को छुएगी।

Nalanda Darpan

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