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बेन में डोर टू डोर जाकर बनाया जा रहा किसानों का फार्मर आईडी 

एग्री स्टैक योजना के तहत आधार व भूमि रिकॉर्ड से जुड़ रही डिजिटल किसान पहचान, जमाबंदी और खेसरा की गड़बड़ी बनी बड़ी बाधा

बेन (नालंदा दर्पण)। भारत सरकार द्वारा एग्री स्टैक पहल के तहत किसानों को विशिष्ट पहचान संख्या या फार्मर आईडी प्रदान करने के लिए डोर-टू-डोर या शिविरों के माध्यम से पंजीकरण किया जा रहा है। यह आधार-आधारित डिजिटल आईडी, जो राज्य के भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी है, किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ, त्वरित ऋण और पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित करती है। इसमें आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और भूमि दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।

यह सर्वे कार्य सुबह से शुरू होकर शाम 5:00 बजे तक निरंतर जारी है। सर्वे टीम घर-घर जाकर किसानों से आवश्यक जानकारी एकत्र कर फार्मर आईडी की प्रक्रिया कराई जा रही। इस दौरान प्रखंड कृषि पदाधिकारी कृष्ण मुरारी, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार देवनारायण प्रसाद, विशेष सर्वेक्षण अमीन सोनु कुमार, श्वेता कुमारी सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे।

किसानों को फार्मर आईडी बनाने में तरह -तरह की बाधाएं हैं। जिसके कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। किसानों से मिली जानकारी अनुसार जमाबंदी में पूर्वजों के नाम दर्ज होने, ऑनलाइन गड़बड़ी, जमाबंदी अपडेट नहीं होने व अन्य कारणों से किसान सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

शिविर व घर-घर जाकर सर्वे करने के बाबजूद सैंकड़ों से अधिक किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। इसके अलावा कुछ ऐसे किसान भी हैं जिनका मोबाइल आधार से लिंक नहीं है। वहीं भूमि विवरण में गड़बड़ी, खेसरा संख्या 00 होने के कारण भी किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो रही है। जमाबंदी में खेसरा संख्या 00 होने के कारण रजिस्ट्रेशन फार्मर आईडी में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है।

प्रखंड कृषि पदाधिकारी कृष्ण मुरारी के अनुसार प्रखंड में कुल निबंधित किसानों की संख्या 4827 है, जिसमें अबतक 799 किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन सका है। यानि कि बेन प्रखंड में तैनात कर्मियों की अथक प्रयास ने फार्मर आईडी बनाने में जिले में अव्वल दिखता नजर आ रहा है।

कृषि पदाधिकारी, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, विशेष सर्वेक्षक अमीन व अन्य कर्मचारी डोर-टू-डोर जाकर आधार ओटीपी के माध्यम से किसानों का पंजीकरण कर रहे हैं। इसमें किसान का आधार कार्ड, उससे लिंक मोबाइल नंबर और भूमि की रसीद अनिवार्य है। यह एक ‘डिजिटल आईडी’ है जो भूमि रिकॉर्ड में बदलाव के साथ स्वतः अपडेट हो जाती है। इससे सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान का लाभ, कृषि ऋण और व्यक्तिगत कृषि सेवाएं आसानी से मिलेंगी।

बेन से नालंदा दर्पण के लिए रामावतार कुमार की रिपोर्ट

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