विद्यालय तिथि भोज: मेनू से हटकर बच्चों और शिक्षकों ने उड़ाए मध्याह्न भोजन
कतरीसराय के प्राईमरी स्कूल कतरपुर में बच्चों और शिक्षकों के उत्साह भरे विद्यालय तिथि भोज ने पारंपरिक मेनू से हटकर पोषणयुक्त साझा भोजन के ज़रिये सामाजिक समरसता और स्कूल-पारिवारिक संबंधों को बढ़ावा दिया।

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। कतरीसराय प्रखंड के प्राईमरी स्कूल कतरपुर में विद्यालय तिथि भोज का आयोजन ऐसा रहा, जिसने बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और शिक्षकों के मन में संतोष दोनों भर दिया। प्रधान शिक्षक धीरेंद्र प्रताप के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने सिर्फ पेट ही नहीं भरा, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिकता का पाठ भी व्यवहार में सिखाया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों को सामूहिक परिवार की भावना, आपसी सहयोग और साझा संस्कृति से जोड़ना रहा। एकल परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच यह तिथि भोज बच्चों के लिए अनुभव आधारित सीख का माध्यम बना।
इस अवसर पर मध्याह्न भोजन योजना के प्रखंड साधन सेवी संतोष कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं विद्यालय शिक्षा समिति की अध्यक्ष सह वार्ड सदस्य रीना देवी, समिति की सचिव किरण देवी सहित अन्य समिति सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
तिथि भोज के दौरान विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। रोज़ के नियमित मध्याह्न भोजन मेनू से हटकर इस दिन बच्चों और शिक्षकों को पोषणयुक्त, संतुलित एवं स्वादिष्ट भोजन परोसा गया। थाली में विविधता और गुणवत्ता ने बच्चों को न केवल आकर्षित किया, बल्कि उन्हें स्वस्थ भोजन के महत्व का भी एहसास कराया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संतोष कुमार एवं अजय प्रसाद ने कहा कि विद्यालयों में इस तरह के आयोजन बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। जब शिक्षक और बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं तो अनुशासन, समानता और अपनत्व का भाव स्वतः विकसित होता है।
कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय परिवार के श्रीकांत प्रसाद सिन्हा, रेखा कुमारी, निशा कुमारी, सरोज देवी, विद्या देवी एवं शशि रंजन का योगदान सराहनीय रहा। सभी ने मिलकर आयोजन को सुव्यवस्थित और बच्चों के लिए यादगार बनाया।
अंत में उपस्थित अतिथियों ने विद्यालय परिवार की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन अन्य विद्यालयों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण हैं, जो शिक्षा को किताबों से बाहर जीवन से जोड़ते हैं।
समाचार स्रोत: कतरीसराय से नालंदा दर्पण डेस्क के लिए संतोष भारती की रिपोर्ट





