
नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नगरनौसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल की हेल्थ मैनेजर को सरकारी एंबुलेंस से नाश्ता करने जाते हुए पकड़ लिया।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की लापरवाही भर नहीं है, बल्कि इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अनुशासन और संसाधनों के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निरीक्षण के दौरान नगरनौसा और चंडी अस्पतालों में कई स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब भी पाए गए, जिस पर सिविल सर्जन ने कड़ी नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
एंबुलेंस का निजी उपयोग करते पकड़ी गई हेल्थ मैनेजरः जानकारी के अनुसार नगरनौसा अस्पताल की हेल्थ मैनेजर पुष्पा कुमारी सरकारी एंबुलेंस का इस्तेमाल निजी कार्य के लिए कर रही थीं। बताया जाता है कि वह अस्पताल परिसर से एंबुलेंस लेकर नाश्ता करने जा रही थीं।
इसी दौरान अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह की नजर उन पर पड़ गई। मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल उन्हें रोककर कड़ी फटकार लगाई।
सिविल सर्जन ने स्पष्ट कहा कि एंबुलेंस केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होती है और उसका निजी उपयोग करना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गंभीर लापरवाही भी है।
आपातकालीन सेवा प्रभावित होने का खतराः डॉ. जयप्रकाश सिंह ने कहा कि सरकारी एंबुलेंस का उद्देश्य गंभीर मरीजों को समय पर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना या जरूरत पड़ने पर उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर करना है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी आपात स्थिति में मरीज को तुरंत एंबुलेंस की जरूरत पड़ जाए और वह किसी कर्मचारी के निजी उपयोग में लगी हो, तो इससे मरीज की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने इसे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और सेवा भावना के विपरीत आचरण बताते हुए ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की बात कही।
नगरनौसा अस्पताल में कई कर्मी मिले गायबः औचक निरीक्षण के दौरान नगरनौसा अस्पताल की कार्यप्रणाली में भी कई खामियां सामने आईं। निरीक्षण के समय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए।
इसके अलावा एएनएम सुनीला कुमारी भी अपनी ड्यूटी से नदारद मिलीं। अस्पताल में कई अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति भी संदिग्ध पाई गई, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए।
सिविल सर्जन ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात कर्मियों की पहली जिम्मेदारी मरीजों की सेवा है और इस तरह की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चंडी अस्पताल में भी मिली गंभीर लापरवाहीः निरीक्षण केवल नगरनौसा तक सीमित नहीं रहा। सिविल सर्जन ने चंडी अस्पताल का भी निरीक्षण किया, जहां भी कई कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित मिले।
अनुपस्थित पाए गए कर्मियों में बीसीएम अमर कबीर, क्लर्क प्रवीण कुमार, डॉ. शिवानी, डॉ. श्वेता प्रिया, दर्शनी और संगीता त्रिपाठी शामिल हैं। इन सभी कर्मचारियों की अनुपस्थिति को गंभीर मानते हुए सिविल सर्जन ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
नौ स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन बंदः निरीक्षण में सामने आई लापरवाही को देखते हुए सिविल सर्जन ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की। उन्होंने चिकित्सक समेत कुल नौ स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है।
साथ ही सभी अनुपस्थित कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो आगे और कठोर कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवालः नालंदा जिले में समय-समय पर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप रहता है कि कई बार अस्पतालों में डॉक्टर या कर्मचारी समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जिससे इलाज प्रभावित होता है।
ऐसे में सिविल सर्जन का यह औचक निरीक्षण स्वास्थ्य व्यवस्था में अनुशासन कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई से अस्पतालों में जवाबदेही बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
प्रशासन ने दिए सख्ती के संकेतः सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में भी इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात किसी भी कर्मचारी द्वारा लापरवाही या संसाधनों के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अनुशासन और जिम्मेदारी दोनों आवश्यक हैं।
उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी कर्मचारी ड्यूटी के प्रति लापरवाह पाया गया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है।
बहरहाल, नगरनौसा और चंडी अस्पतालों में हुए इस औचक निरीक्षण ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कई खामियों को उजागर कर दिया है। एंबुलेंस जैसे आपातकालीन संसाधन का निजी उपयोग और ड्यूटी से कर्मचारियों की अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
हालांकि, सिविल सर्जन की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि स्वास्थ्य विभाग अब लापरवाही के मामलों में सख्ती बरतने के मूड में है। यदि ऐसी कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहती है तो इससे सरकारी अस्पतालों में अनुशासन और सेवा की गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।





