हिलसा में मृत प्रधान शिक्षक के खाते में महीनों होता रहा वेतन भुगतान, जांच की मांग तेज

“तेजस्वी फैंस एसोसिएशन की सचिव गायत्री देवी ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, पटना प्रमंडल को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के हिलसा प्रखंड अंतर्गत कपसियावां पंचायत स्थित नोनिया बिगहा प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विद्यालय के प्रधान शिक्षक स्वर्गीय शशिभूषण पासवान के निधन के बाद भी कई महीनों तक उनके बैंक खाते में वेतन का भुगतान होता रहा।

जानकारी के मुताबिक, प्रधान शिक्षक शशिभूषण पासवान 4 नवंबर 2025 को चुनाव ड्यूटी पर जाते समय अचानक अस्वस्थ हो गए थे। पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 6 नवंबर 2025 को उनका निधन हो गया। परिजनों और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि उनके निधन की सूचना समय पर संबंधित शिक्षा विभाग को दे दी गई थी।

इसके बावजूद आश्चर्यजनक रूप से उनके बैंक खाते में नियमित वेतन का भुगतान जारी रहा। मामला सामने आने के बाद संबंधित खाते के संचालन पर रोक लगा दी गई है। हालांकि इस कार्रवाई के साथ ही मृत शिक्षक के परिजनों को मिलने वाले सेवांत लाभ, पेंशन और अन्य देयकों की प्रक्रिया भी ठप हो गई है, जिससे परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला महज लापरवाही नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितता का संकेत देता है। सवाल यह उठ रहा है कि जब मृत्यु की सूचना विभाग को मिल चुकी थी तो वेतन भुगतान की प्रक्रिया क्यों नहीं रोकी गई? साथ ही, इस दौरान जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

इस मामले को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है। तेजस्वी फैंस एसोसिएशन की सचिव गायत्री देवी ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, पटना प्रमंडल को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई करने तथा मृत शिक्षक के परिजनों को शीघ्र पेंशन और अन्य लाभ उपलब्ध कराने की अपील की है।

यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बनेगा, बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। फिलहाल पूरे मामले पर शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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