खरीफ 2026 की तैयारी तेज: जलवायु अनुकूल खेती और GI उत्पादों के संरक्षण पर बनी रणनीति

पटना में आयोजित 31वीं क्षेत्रीय शोध एवं प्रसार सलाहकार समिति की बैठक में वैज्ञानिकों ने टिकाऊ कृषि, जल प्रबंधन और उन्नत तकनीकों को बताया भविष्य की कुंजी...

“यह बैठक न केवल आगामी खरीफ 2026 सीजन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी, बल्कि बिहार की कृषि को जलवायु अनुकूल और बाजार उन्मुख बनाने की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में भी देखी जा रही है…

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। बिहार में खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर कृषि क्षेत्र में रणनीतिक स्तर पर मंथन तेज हो गया है। कृषि जलवायु क्षेत्र जोन–III बी के अंतर्गत 31वीं क्षेत्रीय शोध एवं प्रसार सलाहकार समिति की बैठक पटना स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित की गई, जिसमें किसानों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान और प्रसार कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

मगही पान अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एस.एन. दास ने बताया कि बैठक में राज्यभर के कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आगामी खरीफ मौसम की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

बैठक के मुख्य अतिथि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य के कारण कृषि क्षेत्र नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने उन्नत किस्मों, बेहतर फसल प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बताया। साथ ही उन्होंने बिहार के भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों जर्दालु आम, मगही पान, शाही लीची, कतरनी धान और सबौर मखाना के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर विपणन व्यवस्था पर विशेष बल देते हुए कहा कि इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को कृषि विकास के मुख्य आधार के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, नियमित मिट्टी जांच, जैविक खाद के प्रयोग और संतुलित उर्वरक उपयोग से खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्नत बीज, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती की ओर अग्रसर करने की आवश्यकता बताई गई।

डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. रणधीर कुमार समेत अन्य विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान से विकसित तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

बैठक में कृषि विस्तार तंत्र को मजबूत करने पर भी विशेष चर्चा हुई, जिसमें किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और फील्ड डेमो को बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाकर उनकी निर्णय क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।

अंततः खरीफ-2026 के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार की गई, जिसमें अनुसंधान, प्रसार, प्रशिक्षण और तकनीकी हस्तांतरण को प्राथमिकता दी गई। वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत बीजों और आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाते हुए क्षेत्र की कृषि को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और लाभकारी बनाया जाएगा।

Kharif 2026 Strategy Focuses on Climate 1
Experts emphasize sustainable agriculture, modern techniques, and farmer income growth in Patna meeting

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