“गंगा किनारे की प्राकृतिक परिस्थितियां और पारंपरिक खेती की पद्धति ही दुधिया मालदा आम को विशेष स्वाद देती है। आधुनिक तकनीक, आकर्षक पैकेजिंग और सशक्त विपणन रणनीति के जरिए इस आम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है…
इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। बिहार की उपजाऊ धरती एक बार फिर अपनी खास पहचान को लेकर चर्चा में है। पटना के गंगा तट पर उगने वाला दीघा का दुधिया मालदा आम अपने अनोखे स्वाद, सुगंध और मिठास के कारण न केवल स्थानीय बल्कि व्यापक स्तर पर लोकप्रिय हो चुका है। यह आम अब बिहार की कृषि पहचान के रूप में स्थापित होता जा रहा है।
मगही पान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसएन दास ने बताया कि गंगा किनारे की उपजाऊ मिट्टी, ठंडी हवाएं और अनुकूल जलवायु इस आम को विशिष्ट गुणवत्ता प्रदान करती हैं। यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और लोग इसे खास पसंद कर रहे हैं।
इस अनमोल विरासत के संरक्षण और विस्तार को लेकर पटना स्थित उद्यान निदेशालय कृषि विभाग बिहार सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार (IFS) ने की। इसमें दीघा मालदा आम के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में पूर्व आईएएस अधिकारी विजय प्रकाश, बिहार विद्यापीठ, सदाकत आश्रम से जुड़े विशेषज्ञों के साथ-साथ कई प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। सभी ने एकमत होकर पारंपरिक किस्मों के संरक्षण और वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि दीघा मालदा आम की इस समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखते हुए किसानों के हित में ठोस कदम उठाए जाएंगे। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बिहार की कृषि पहचान भी और मजबूत होगी।


