नालंदा की यह घटना (Love Trap Gang)एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में हर ‘दोस्ती’ भरोसेमंद नहीं होती। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है…
नालंदा दर्पण डेस्क। सोशल मीडिया पर बनती दोस्तियां अब सिर्फ रिश्तों की कहानी नहीं रच रहीं, बल्कि अपराध (Love Trap Gang) की नई पटकथा भी लिख रही हैं। नालंदा जिले में सामने आया ताजा मामला इसी खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है, जहां इंस्टाग्राम के जरिए बुने गए ‘प्रेमजाल’ में फंसाकर एक युवक का अपहरण कर लिया गया और उसके बदले 6 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। पुलिस की तत्परता से युवक को सुरक्षित छुड़ा लिया गया, लेकिन इस घटना ने डिजिटल युग के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि नालंदा के एक गांव की रहने वाली युवती ने शेखपुरा जिले के पांची गांव निवासी 22 वर्षीय विक्रम कुमार से इंस्टाग्राम पर संपर्क साधा। शुरुआत में सामान्य बातचीत हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती और फिर भरोसे में बदल गई। इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए युवती ने विक्रम को मिलने के लिए बुलाया।
28 अप्रैल की रात तय योजना के तहत विक्रम कुमार चोरसुआ मोड़ पर पहुंचा, जहां पहले से घात लगाए बैठे अपराधियों ने उसे अगवा कर लिया। इसके तुरंत बाद बदमाशों ने युवक के पिता सागर रविदास को फोन कर 6 लाख रुपये की फिरौती की मांग की। अचानक आई इस घटना से परिवार में हड़कंप मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लेते हुए पंचाने नदी के आसपास छापेमारी शुरू की। हालांकि शुरुआती दबिश में आरोपी हाथ नहीं आए, लेकिन लगातार निगरानी और दबाव के कारण अपराधियों की घेराबंदी तेज हो गई।
पुलिस की सख्ती और गिरफ्तारी के डर से आरोपियों ने अपहृत युवक को पावापुरी फ्लाइओवर के पास छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया।
बरामदगी के बाद पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपने बॉयफ्रेंड राजा और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम देने की बात स्वीकार की। फिलहाल पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और जल्द ही पूरे गिरोह के पकड़े जाने का दावा कर रही है।
यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम जहां एक ओर लोगों को जोड़ने का माध्यम हैं, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के लिए आसान टारगेटिंग टूल भी बनते जा रहे हैं। लव ट्रैप जैसे अपराध अब डिजिटल रूप ले चुके हैं, जहां भावनात्मक विश्वास को हथियार बनाकर अपराध को अंजाम दिया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अपराधी पहले शिकार की मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग करते हैं, फिर धीरे-धीरे उसे अपने जाल में फंसाते हैं। जब भरोसा पूरी तरह बन जाता है, तब वारदात को अंजाम दिया जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से निजी जानकारी साझा न करें। पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक और सुरक्षित स्थान पर करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें। परिवार और दोस्तों को अपनी लोकेशन की जानकारी देते रहें।



