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बिहारशरीफ-तेल्हाड़ा में नया बाइपास और परवलपुर में बनेगा एलिवेटेड स्ट्रक्चर

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में यातायात को सुगम बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (पुराना एनएच-110) के चौड़ीकरण और बाइपास निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। इस परियोजना के तहत तेल्हाड़ा और बिहारशरीफ में बाइपास के साथ-साथ परवलपुर में एक एलिवेटेड स्ट्रक्चर का निर्माण प्रस्तावित है, जो जिले की यातायात व्यवस्था को नया आयाम देगा।

सांसद कौशलेंद्र कुमार और जिलाधिकारी कुंदन कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित एक सार्वजनिक परामर्श बैठक में इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक में प्रभावित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ सहमति बनाई गई, ताकि परियोजना का कार्य सुचारु रूप से शुरू हो सके।

परियोजना के अंतर्गत अरवल-बिहारशरीफ मार्ग, जो वर्तमान में 7 मीटर चौड़ा दो लेन का है, उसे 14 मीटर चौड़ा चार लेन (2×7 मीटर) का बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यातायात की भीड़ को कम करने के लिए निम्नलिखित निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं:

तेल्हाड़ा बाइपास 2.57 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें 0.4 किलोमीटर रियलाइनमेंट शामिल है। परवलपुर एलिवेटेड स्ट्रक्चर 1.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड होगा। बिहारशरीफ बाइपास 3.03 किलोमीटर लंबा होगा।

इसके अलावा पूरे मार्ग में सात स्थानों पर बाइपास निर्माण की योजना है, जो नालंदा जिले के यातायात को और अधिक सुगम बनाएगी। एनएच-33 अरवल से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के फरक्का तक जाता है और नालंदा जिले में तेल्हाड़ा (54 किमी) से बिहारशरीफ (89 किमी) तक फैला है।

इस बैठक में सांसद कौशलेंद्र कुमार ने इस परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल नालंदा जिले में यातायात की स्थिति को बेहतर बनाएगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगी। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने परियोजना के शीघ्र और अवरोध-मुक्त क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री प्रतिनिधि, अपर समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और तीनों अंचलों के अधिकारी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस परियोजना का प्रभाव केवल यातायात तक सीमित नहीं रहेगा। चार लेन सड़क और बाइपास के निर्माण से नालंदा जिले में काफी लाभ होने की उम्मीद है।

तेल्हाड़ा और बिहारशरीफ जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाम की समस्या कम होगी। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। नालंदा, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। निर्माण कार्य के दौरान और बाद में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

हालांकि परियोजना की रूपरेखा तैयार हो चुकी है, फिर भी इसके सामने कुछ चुनौतियां हैं, जैसे भू-अर्जन और स्थानीय समुदाय के सहयोग को सुनिश्चित करना। जिलाधिकारी ने भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए भी उपाय किए जा रहे हैं।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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