नालंदा में 524.93 एकड़ में बनेगा नया औद्योगिक क्षेत्र

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। वह अब औद्योगिक विकास की नई राह पर अग्रसर है। बिहार सरकार ने जिले में औद्योगिक प्रगति को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में नालंदा जिले में 524.93 एकड़ भूमि पर एक नए औद्योगिक क्षेत्र के विकास को मंजूरी दी गई है।
इस परियोजना के लिए बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) को 2 अरब 64 करोड़ 65 लाख 42 हजार 281 रुपये की लागत से भूमि के स्थायी हस्तांतरण का आदेश जारी किया गया है। यह परियोजना न केवल जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास से नालंदा में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और जिला एक नए औद्योगिक हब के रूप में उभरेगा। इस परियोजना से छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को न केवल बिहार के अन्य जिलों, बल्कि अन्य राज्यों में भी भेजा जा सकेगा। यह कदम नालंदा की औद्योगिक पहचान को और मजबूत करेगा। साथ ही क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और आवागमन की बेहतर सुविधाओं के कारण निवेशकों का आकर्षण भी बढ़ेगा।
औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया दो प्रमुख अंचलों में की जाएगी। हरनौत अंचल के तेलमर, मुढ़ारी और आसपास के गांवों में 263.15 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए 1 अरब 64 करोड़ 90 लाख 75 हजार 848 रुपये की स्वीकृति दी गई है।
वहीं चंडी अंचल के कचरा टाल क्षेत्र में 261.80 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए 99 करोड़ 74 लाख 66 हजार 433 रुपये आवंटित किए गए हैं।
बियाडा को इस दिशा में तेजी से कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की संभावना है, जिससे परियोजना को गति मिलेगी।
औद्योगिक क्षेत्र के लिए सालेपुर-राजगीर फोरलेन मार्ग को चुना गया है, जो पहले स्टेट हाइवे टू-लेन था और अब इसे एनएच फोर-लेन में अपग्रेड किया गया है। यह मार्ग बुद्ध सर्किट से जुड़ा हुआ है, जिससे आवागमन और माल ढुलाई में सुगमता आएगी।
इसके अतिरिक्त बिहटा-सरमेरा मार्ग भी इस औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ेगा, जिससे कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। यह बुनियादी ढांचा औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और उनके संचालन को सुविधाजनक बनाएगा।
इस औद्योगिक क्षेत्र की परिकल्पना मुख्यमंत्री की एक यात्रा के दौरान सामने आई थी, जब उन्होंने नालंदा में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को देखा। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन और बियाडा को उपयुक्त भूमि की खोज के लिए निर्देश दिए।
उद्योग विभाग, बियाडा और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने हरनौत और चंडी अंचलों में संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया। तेलमर, मुढ़ारी और कचरा टाल गांवों की भूमि को उपयुक्त पाए जाने के बाद एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दी।
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के बाद नालंदा एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में स्थापित होगा। यह परियोजना न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को उनके ही जिले में रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करेगी। इसके अलावा यह क्षेत्र निवेश का एक नया केंद्र बनेगा, जिससे नालंदा की आर्थिक स्थिति को और बल मिलेगा।







