धनरुआ BEO के सामने ACS केके पाठक भी बौना

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सुशासन का लाख ढिंढोरे पीट लें, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक लाख हकड़ दिखा लें। उनके नाक के नीचे एक ऐसा अफसर है, जो किसी की नहीं सुनता। उस पर कहीं से कोई कार्रवाई नहीं होती है। जांच का विषय है कि आखिर एक अदद पदाधिकारी इतना रसुखदार है? या फिर वह उपर तक चांदी का जूता मारता है?

जी हां। हम बात कर रहे हैं पटना जिला के धनरुआ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस महाशय पर निलंबन तक की कार्रवाई करने की एक नहीं, बल्कि तीन बार अनुसंशा की, लेकिन प्राथमिक शिक्षा निदेशक स्तर पर तीनों बार अपनी गोटी फिट करके प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपना झंडा बुलंद किए हुए हैं।

पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक को पहली बार 16 दिसंबर, 23 को पत्रांक-4131 के जरिए लिखा था कि धनरुआ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नवल किशोर सिंह के विरुद्ध मध्य विद्यालय विजयपुरा में पदास्थापित प्रखंड शिक्षक राकेश कुमार रजंन से सेवा पुस्त सत्यापन के नाम पर नाजायज राशि मांगने की खबर के साथ ऑडियो क्लिप वायरल हुई है।

इस आलोक में स्पष्टीकरण पृच्छा का श्री सिंह ने खंडन नहीं किया और उसे तोड़ मरोड़कर प्रसारित करने के संदर्भ में अपना पक्ष रखा। श्री सिंह द्वारा शिक्षक से काम के एवज में नाजायज राशि की मांग करने एवं उसकी खबर प्रकाशित होने पर विभाग की छवि धुमिल हुई है। इस आलोक में बिहार सीसीए रुल 2005 के सुसंगत प्रावधान के अंतर्गत श्री सिंह को तत्काल निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की जा रही है।

इसके बाद पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी अमित कुमार ने प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक को 3 जनवरी,2024 को कार्यालय पत्रांक-64 के तहत पूर्व कार्यालय पत्रांक 1624 दिनांक 26.05.2023 एवं पत्रांक 4121 दिनांक 16.12.2023 के आलोक में लिखा कि धनरुआ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नवल किशोर सिंह के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर भेजते हुए निलंबित करने की अनुसंशा की जाती है।

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