नगर परिषद इस्लामपुर में बहुमत से नियुक्ति घोटाला? अवैध बहाली पर मचा बवाल

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। नगर परिषद इस्लामपुर में नियुक्तियों को लेकर जो आशंका अब तक गलियारों में फुसफुसाहट थी, वह अब बोर्ड बैठक में सार्वजनिक आरोप बन चुकी है। आज 05 जनवरी 2026 को हुई नगर परिषद की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने खुलकर कहा कि परिषद में की गई कई बहालियाँ नियमों की हत्या और प्रक्रिया की खुली अवहेलना हैं।
बैठक के दौरान यह बात रिकॉर्ड पर लाई गई कि पूर्व में की गई नियुक्तियाँ न तो निर्धारित मापदंडों पर खरी उतरती हैं और न ही इनमें सरकारी दिशा-निर्देश, आरक्षण नीति और योग्यता का पालन किया गया। सवाल यह नहीं कि गलती हुई? सवाल यह है कि यह गलती जानबूझकर की गई या कराई गई?
नियुक्ति रद्द करने का प्रस्ताव, लेकिन बहुमत का कवचः सूत्रों के मुताबिक जब इन संदिग्ध नियुक्तियों को निरस्त करने का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया, तो नियमों के बजाय बहुमत का हवाला देकर प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। इससे यह संदेह और गहरा गया कि कहीं नगर परिषद में नियम नहीं, नंबर गेम तो नहीं चल रहा?
बैठक में पार्षदों ने साफ शब्दों में कहा कि बहुमत का मतलब यह नहीं होता कि कानून को भी वोट से हरा दिया जाए।
योग्य बेरोज़गार बाहर, अपात्र अंदर? शिकायत में यह भी उल्लेख है कि अनियमित नियुक्तियों के चलते कई योग्य और पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों का सीधा हनन हुआ है। यह सिर्फ नौकरियों का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास के साथ खिलवाड़ का मामला है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर नगर परिषद जैसी संवैधानिक संस्था में इस तरह नियुक्तियाँ होंगी, तो फिर सुशासन की बात महज़ दिखावा बनकर रह जाएगी।
सवालों के घेरे में प्रशासन की चुप्पीः सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बोर्ड बैठक में नियुक्तियों को नियमविरुद्ध बताया गया, तब भी अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारी जांच से बच रहे हैं या किसी दबाव में हैं?
निष्पक्ष जांच नहीं तो मामला जाएगा ऊपरः आवेदन में स्पष्ट मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, नियमविरुद्ध की गई सभी नियुक्तियों को तुरंत रद्द किया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यदि नगर स्तर पर इस मामले को दबाने की कोशिश हुई तो यह मुद्दा जिला, निगरानी विभाग और राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा।





