बिहार सूचना आयुक्त ने खुदागंज थानाध्यक्ष पर लगाया ₹25,000 का अर्थदंड

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जनता को समय पर और सही जानकारी प्रदान करना लोक सूचना पदाधिकारी की जिम्मेदारी है। आयोग के निर्देशों की अवहेलना न केवल अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि इससे लोक प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगता है

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त त्रिपुरारि शरण ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए खुदागंज थानाध्यक्ष नालंदा के विरुद्ध ₹25,000 का अर्थदंड अधिरोपित किया है। यह आदेश वाद संख्या A4538/2023 में श्रीमती चम्पा देवी बनाम प्रथम अपीलीय प्राधिकार-सह-अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी हिलसा मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।

मुख्य सूचना आयुक्त ने पाया कि खुदागंज थानाध्यक्ष ने आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया है। 11 सितंबर 2024 की सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर आयोग द्वारा उन्हें स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया था। लेकिन थानाध्यक्ष ने न तो स्पष्टीकरण समर्पित किया और न ही आयोग के निर्देशों का पालन किया। इसके बाद 27 नवंबर 2024 की सुनवाई में भी उनकी अनुपस्थिति ने मामला और गंभीर कर दिया।

उसके बाद मुख्य सूचना आयुक्त त्रिपुरारि शरण ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा-20(1) के अंतर्गत थानाध्यक्ष पर ₹25,000 का अर्थदंड लगाया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक नालंदा को निर्देशित किया कि वे इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराएं।

वहीं मुख्य सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि खुदागंज थानाध्यक्ष, जो लोक सूचना पदाधिकारी भी हैं, उन्हें 11 फरवरी 2025 को सुबह 11:30 बजे आयोग के समक्ष अनिवार्य रूप से सदेह उपस्थित होना होगा।

बहरहाल यह आदेश आवेदिका श्रीमती चम्पा देवी पत्नी श्री विष्णु देव गिरी, निवासी ग्राम पिलखी पोस्ट-बौरीसराय थाना-खुदागंज नालंदा के पक्ष में दिया गया है। बिहार सूचना आयोग के अवर सचिव चन्दन कुमार सिंह ने यह सूचना आवेदिका को प्रेषित कर दी है।

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