Thursday, February 12, 2026
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    बिहार का एकलौता बीड़ी श्रमिक अस्पताल, जहां कराह रही है जार्ज साहब की आत्मा

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में 20 वर्ष पूर्व बीड़ी मजदूरों को स्वस्थ रखने के उद्देश्य 12 करोड़ की लागत से बिहार राज्य का एकलौता 30 बेड का बीड़ी श्रमिक अस्पताल (hospital) बनाया गया था, जो आज खुद इलाज के लिए तड़प रहा है।

    शहर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर विद्यावानी में पांच से सात बीघा में बने बीड़ी श्रमिक अस्पताल अपने जमाने में सबसे आधुनिक संसाधनयुक्त अस्पतालों में जाना जाता था, उस समय चंडीगढ़ से एक करोड़ की सिर्फ एक्स-रे मशीन यहां लायी गयी थी।

    बिहार और झारखंड के असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले बीड़ी, खनन, लौह और माइका के खादानों के मजदूरों के लिए यह अस्पताल बनाया गया था, लेकिन देखरेख और प्रशासनिक अनदेखी के कारण धीरे-धीरे दूसरों को इलाज करने वाला यह अस्पताल खुद बीमार हो गया।

    चार साल पूर्व कोरोना काल में बीड़ी श्रमिक अस्पताल को कोविड सेंटर बनाया गया था, जो कोरोना संक्रमितों के लिए बेहतर काम किया। कोरोना काल से पूर्व इस बीड़ी अस्पताल में प्रतिदिन 200 से 300 तक मरीज इलाज के लिए यहां आते थे, लेकिन वर्तमान में दस से 20 मरीज भी बामुश्किल पहुंच रहे हैं।

    अभी बीड़ी अस्पताल में पर्याप्त दवाएं हैं, लेकिन मरीजों की जांच के लिए आधुनिक मशीन, एंबुलेंस और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। कोविड सेंटर के बाद कुछ दिन के लिए इस अस्पताल की देखरेख की व्यवस्था चरमरा गयी थी।

    नतीजतन यहां चोरों के साथ असामाजिक तत्वों की अड्डा बन गया। दो चार चोरों ने अस्पताल से काफी समान चुरा ले गये। नाइट गाइड के अभाव में असामाजिक तत्वों ने अस्पताल के अधिकतर खिड़कियां तोड़ दिये। अस्पताल कैंपस में लगी लाइटों को क्षतिग्रस्त कर दी गयी।

    फिलहाल कुल 20 सृजित पद के जगह दो डॉक्टरों समेत कुल 15 स्वास्थ्य कर्मी यहां कार्यरत हैं। छह डॉक्टर की जगह दो डॉक्टर कार्यरत हैं। अस्पताल कैंपस में ही डॉक्टर से लेकर स्टॉफ के रहने के लिए क्वाइटर बना हुआ है, जहां कुछ दिनों से पानी और बिजली की आपूर्ति प्रभावित हैं।

    बीड़ी श्रमिक अस्पताल में निर्माण के समय ही बहुत बड़ा पानी टंकी बनायी गयी थी। जिससे अब तक पानी नहीं टपका है। लाखों रुपये खर्च के बाद भी पानी टंकी लोगों की उपयोगिता में नहीं शामिल हुआ।

    वर्ष 2004 में 12 करोड़ की लागत से बने इस बीड़ी श्रमिक अस्पताल का सुध लेने वाला कोई नहीं है। भारत सरकार के तत्कालीन रक्षामंत्री-सह-नालंदा सांसद जार्ज फर्नाडिंस ने 12 जनवरी 2004 को बीड़ी श्रमिक अस्पताल निर्माण का आधारशीला रखी थीं।

    बीड़ी श्रमिक अस्पताल की निर्माण की कल्पना इसी से किया जा सकता था, लेकिन जहां वर्तमान बने रहे बहुत से अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट डिस्पोज मशीन नहीं स्थापित हो रहे हैं, वहां 20 साल पूर्व ही मेडिल वेस्ट डिस्पोज मशीन लगायी गई थी।

    बीड़ी श्रमिक अस्पताल में आज भी हाइटेक इंडक्शन पायरोलिसिस इंसीनरेटर मशीन लगी है। जिले में सिर्फ इसी अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट नष्ट करने की सुविधा है, जो फिलहाल रखरखाव के अभाव में बर्बाद होने के कगार तक पहुंच गया हैं।

    देखरेख के अभाव में अस्पताल कैंपस के आधा हिस्सा जंगल में तब्दील हो गया है। जहां सांप- बिच्छूओं का घर बनता जा रहा है। छह वर्ष पूर्व में आयी बाढ़ से अस्पताल को काफी नुकसान पहुंचा है।

    उस समय बाढ़ के पानी पूरे बीड़ी श्रमिक अस्पताल परिसर में घुस गया था, जिसे उसके दरवाजे, मशीन, बेड को खराब कर दिया। पंचानवे नदी के किनारे अस्पताल की चहादीवारी गिर गयी थी, जिसकी अब तक मरम्मत नहीं हुई हैं।

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    नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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