बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। भारत सरकार के ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की वास्तविक प्रगति और प्रभावशीलता का आकलन करने के उद्देश्य से केंद्र से आई दो सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम (Central Monitoring Team in Nalanda) का चार दिवसीय सघन मॉनिटरिंग दौरा संपन्न हो गया। इस दौरे ने जिले में संचालित योजनाओं की कागजी उपलब्धियों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को परखने का प्रयास किया।
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा फरवरी 2026 के द्वितीय पखवाड़े में निरीक्षण के लिए अवर सचिव पियूष रंजन तथा लेखा अधिकारी प्रवीण कुमार झा को नामित किया गया था। दौरे से पूर्व आर्थिक अधिकारी (दिशा प्रभाग) राहुल यादव ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर विस्तृत कार्यक्रम साझा किया और अधिकारियों के आवास व परिवहन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।
जल संरक्षण और आवास योजना की पड़तालः निरीक्षण की शुरुआत गिरियक प्रखंड से हुई। ग्राम पंचायत पुरैनी के हैबतपुर में निर्माणाधीन चेकडैम का स्थल निरीक्षण कर तकनीकी गुणवत्ता, लागत और उपयोगिता की समीक्षा की गई। जल संरक्षण की दृष्टि से इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे आसपास के खेतों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सैदपुर में कचरा प्रबंधन इकाई की कार्यप्रणाली की जांच की गई, जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था और स्थानीय भागीदारी का आकलन हुआ। जलालपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के एक लाभार्थी के आवास का निरीक्षण कर निर्माण गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल-जवाब किए गए।
जीविका समूहों की आर्थिक सक्रियताः पावापुरी में दो जीविका ग्राम संगठनों की गतिविधियों का आकलन किया गया। विशेष रूप से भगवान महावीर आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थान परिसर में संचालित ‘जीविका दीदी की रसोई’ का जायजा लेकर टीम ने महिला स्वयं सहायता समूहों की आय सृजन क्षमता और प्रबंधन कौशल की समीक्षा की। विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि जहां समूहों में उत्साह है, वहीं विपणन और वित्तीय सुदृढ़ीकरण की जरूरत बनी हुई है।
पइन खुदाई और पौधारोपण अभियानः राजगीर प्रखंड की ग्राम पंचायत प्यारेपुर में पइन (पारंपरिक जल निकासी संरचना) खुदाई कार्य का निरीक्षण कर टीम ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। लाभार्थियों से प्राप्त फीडबैक में समय पर मजदूरी भुगतान और कार्य गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे सामने आए।
पंचायत मेयार में पइन खुदाई, आवास योजना और जीविका समूहों की बैठक में भाग लेकर प्रगति की समीक्षा की गई। यहां पौधारोपण अभियान की स्थिति भी देखी गई, जहां रोपे गए पौधों के संरक्षण की चुनौती स्पष्ट रूप से सामने आई।
अमृत सरोवर और स्वच्छता पर जोरः गोरौर पंचायत के रटना गांव में पौधारोपण, अमृत सरोवर और कचरा प्रबंधन इकाई का निरीक्षण किया गया। जल संरक्षण और स्वच्छता योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर टीम ने विशेष ध्यान दिया।
थरथरी प्रखंड के छरियारी पंचायत में पइन खुदाई तथा नोनिया बिगहा में पौधारोपण कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई। निरीक्षण में यह पाया गया कि कई स्थानों पर कार्य प्रगति संतोषजनक है, परंतु रखरखाव की स्थायी व्यवस्था अभी भी चुनौती बनी हुई है।
शिक्षा और खेल अवसंरचना पर नजरः अस्ता पंचायत के नारारी मध्य विद्यालय में चहारदीवारी और पेवर ब्लॉक निर्माण का निरीक्षण किया गया। उच्च विद्यालय परिसर में बन रहे महात्मा गांधी खेल परिसर की प्रगति का भी आकलन हुआ। खेल अवसंरचना को ग्रामीण युवाओं के लिए सकारात्मक पहल माना गया, हालांकि निर्माण की समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई गई।
कागज बनाम जमीनः चार दिवसीय दौरे का समग्र विश्लेषण यह संकेत देता है कि जिले में ग्रामीण विकास योजनाओं का ढांचा सक्रिय है, परंतु गुणवत्ता पारदर्शिता और दीर्घकालिक रखरखाव के मोर्चे पर अभी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
केंद्र की टीम द्वारा लाभार्थियों से सीधे संवाद और स्थल निरीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी सुनिश्चित होगा, जब स्थानीय स्तर पर जवाबदेही मजबूत हो और नियमित सामाजिक अंकेक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
जिला प्रशासन के लिए यह दौरा एक संकेत भी है कि भविष्य में केवल भौतिक उपलब्धियों के बजाय गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनसंतुष्टि को भी सफलता का मानदंड बनाना होगा। स्रोतः नालंदा दर्पण/बिहारशरीफ रिपोर्टर
