मां दुर्गा की कठिन आराधना करने वाले युवक की मौत पर सदर अस्पताल में बवाल

उस समय स्थिति और भयावह हो गई, जब मां दुर्गा की कठिन आराधना करने वाले युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात नर्स पर हमला कर दिया और उसे पीट डाला। नर्स को रोकने की कोशिश कर रहे निजी गार्ड और वार्ड बॉय को उठाकर फर्श पर पटक दिया गया। भीड़ चिकित्सक के कक्ष की ओर बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए डॉक्टर और कर्मचारी जान बचाने के लिए भागे और खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा की कठिन आराधना करने वाले एक युवक की अचानक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। लेकिन दुख की इस घड़ी में परिजनों का गुस्सा इतना भड़क उठा कि बिहारशरीफ के सदर अस्पताल में उपद्रव का तांडव मच गया। आक्रोशित भीड़ ने इमरजेंसी वार्ड में जमकर तोड़फोड़ की, नर्स की पिटाई की और अस्पताल को युद्धक्षेत्र बना दिया।
बताया जाता है कि दीपनगर थाना क्षेत्र के नेपुरा गांव निवासी रामविलास सिंह का 28 वर्षीय पुत्र संजय सिंह नवरात्र के मौके पर मां दुर्गा की विशेष आराधना कर रहे थे। वे सीने पर कलश रखकर कठिन तपस्या में लीन थे, जो देवी भक्तों की एक पारंपरिक और जोखिम भरी प्रथा है। आराधना के आठवें दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन घबराकर उन्हें तुरंत सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की पुष्टि के लिए शव को विम्स भी ले जाया गया, जहां भी यही बात सामने आई।
परिजनों के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। लेकिन दुख जल्द ही गुस्से में बदल गया। ग्रामीणों और परिजनों की भीड़ ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि इलाज में लापरवाही हुई, हालांकि चिकित्सकों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि युवक की हालत पहले से ही गंभीर थी।
आक्रोशित भीड़ ने इमरजेंसी वार्ड में पहुंचकर अपना गुस्सा उतारा। गेट का शीशा तोड़ दिया, पर्ची काउंटर और कम्प्यूटर को क्षतिग्रस्त कर दिया। कई चिकित्सकीय उपकरण और अन्य सामान भी उनके निशाने पर आए। उपद्रवियों ने अस्पताल में करीब 10 लाख रुपये की सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाया।
उस समय स्थिति और भयावह हो गई, जब भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात नर्स पर हमला कर दिया और उसे पीट डाला। नर्स को रोकने की कोशिश कर रहे निजी गार्ड और वार्ड बॉय को उठाकर फर्श पर पटक दिया गया। भीड़ चिकित्सक के कक्ष की ओर बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए डॉक्टर और कर्मचारी जान बचाने के लिए भागे और खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. विश्वजीत कुमार ने बताया कि अगर हम ऐसा न करते तो शायद हमारी जान को भी खतरा हो जाता। परिजनों का गुस्सा इतना था कि कुछ भी हो सकता था।
उस समय अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। मरीजों की चीखें, तोड़फोड़ की आवाजें और भागते हुए स्टाफ। यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। गार्ड ने बताया कि भीड़ को संभालना असंभव हो गया था। सूचना मिलते ही सदर डीएसपी नूरुल हक तीन थानों की पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक उपद्रवी फरार हो चुके थे।
उपद्रव के बाद चिकित्सकों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। उन्होंने सुरक्षा की कमी और त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए इमरजेंसी, ओपीडी और पोस्टमार्टम सेवाएं ठप कर दीं। इससे पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया और अन्य मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन (सीएस) और डीपीएम ने चिकित्सकों के साथ आपात बैठक बुलाई। दुर्गा पूजा के मद्देनजर, जहां मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है, डॉक्टरों ने 6 घंटे बाद हड़ताल समाप्त कर दी। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। डॉ. विश्वजीत कुमार ने कहा कि सदर अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो हम काम नहीं करेंगे।
अस्पताल अधीक्षक ने 10 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। डीएसपी नूरुल हक ने बताया कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। सीसीटीवी फुटेज से अज्ञात उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
बहरहाल यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाती है। बिहार में ऐसे उपद्रव की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो चिकित्सा व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं। नालंदा दर्पण की टीम उम्मीद करती है कि प्रशासन जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करेगा और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाएगा।
(नालंदा दर्पण की यह रिपोर्ट घटना के प्रत्यक्षदर्शियों, अस्पताल स्टाफ और पुलिस सूत्रों पर आधारित है।)





