नीतीश सरकार को गिराने की साजिश का खुलासा, इंजीनियर सुनील को नोटिस

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। साल 2024 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को अस्थिर करने की कथित साजिश के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने मुख्य अभियुक्त इंजीनियर सुनील को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उनके दोनों पतों ग्राम सहदुल्लापुर, थाना गंगा ब्रिज, जिला वैशाली और मोहल्ला किदवईपुरी, थाना कोतवाली, जिला पटना पर तामील कराया गया है।

ईओयू की जांच में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। विश्वास मत से ठीक पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त, अवैध धन के लेन-देन और अपहरण की सुनियोजित साजिश रची गई थी। इस मामले में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक सुधांशु शेखर ने 11 फरवरी 2024 को पटना के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसकी जांच अब ईओयू के हवाले है।

सूत्रों के अनुसार जांच में हवाला के जरिए धन लेन-देन, विभिन्न शहरों से साजिश रचने और कई राजनीतिक दलों के बीच गठजोड़ की परतें उजागर हुई हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और यहां तक कि नेपाल से इस साजिश के तार जुड़े होने के सबूत मिले हैं। ईओयू को पता चला है कि यदि नीतीश सरकार विश्वास मत हार जाती तो महागठबंधन के पक्ष में वोट देने वाले विधायकों को हवाला के माध्यम से मोटी रकम दी जाती। इसके लिए अपहरण और लालच का एक पूरा तंत्र तैयार किया गया था।

जदयू विधायक सुधांशु शेखर ने अपनी शिकायत में बताया कि 9 फरवरी 2024 की रात उनके मेहमान के जरिए इंजीनियर सुनील का फोन आया। सुनील ने कहा कि आप महागठबंधन के साथ आ जाइए। पांच करोड़ रुपये अभी दे देंगे और पांच करोड़ सरकार गिरने के बाद। नहीं तो मंत्री पद ले लीजिए। सुनील ने खुद को किदवईपुरी पटना का निवासी बताया और कहा कि जरूरत पड़े तो वह डेरा पर आ सकता है।

अगले दिन 10 फरवरी को सुबह 10:11 बजे पूर्व मंत्री नागमणि कुशवाहा के नंबर से कॉल आया, जिसमें कहा गया कि अखिलेश जी उनसे बात करना चाहते हैं। थोड़ी देर बाद 11:02 बजे एक इंटरनेट कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को राहुल गांधी का करीबी बताया और कहा कि आप गठबंधन का समर्थन करें, आपकी हर मांग पूरी होगी।

सुधांशु शेखर ने शिकायत में दावा किया कि जदयू के कई विधायकों को लालच और धमकी दी गई। हिलसा से विधायक कृष्ण मुरारी शरण को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रवक्ता शक्ति यादव के कहने पर एक व्यक्ति ने मंत्री पद और मनचाही रकम का ऑफर दिया। विधायक निरंजन मेहता को भी धमकाया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि विधायक बीमा भारती और दिलीप राय को डरा-धमका कर अगवा कर लिया गया। ताकि वे विश्वास मत में सरकार के खिलाफ वोट करें। उनके परिजनों से पूछताछ के बावजूद अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है।

सुधांशु शेखर ने अपनी शिकायत में जदयू के ही विधायक डॉ. संजीव कुमार (परबत्ता) की भूमिका को संदिग्ध बताया। आरोप है कि डॉ. संजीव विपक्ष की साजिश में शामिल थे और अन्य विधायकों को सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए उकसा रहे थे।

ईओयू ने इस मामले में जांच तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक हवाला ऑपरेटरों, संदिग्ध कॉल्स और साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस साजिश में कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा शामिल था।

इस खुलासे ने बिहार के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जदयू ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है, जबकि विपक्षी दलों ने इन आरोपों को सत्ताधारी पार्टी का राजनीतिक स्टंट बताया है। राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि यह सब नीतीश सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। वहीं जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सच्चाई जल्द सामने आएगी और साजिशकर्ताओं को बख्शा नहीं जाएगा।

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