हिलसा, हरनौत और अस्थावां के BEO-BEP की लापरवाही पर DEO की कार्रवाई

हिलसा (नालंदा दर्पण संवाददाता)। सभी सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन कई प्रखंडों में छात्र-छात्राओं को अब तक निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। इस गंभीर लापरवाही को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने कड़ा रुख अपनाते हुए हिलसा, हरनौत और अस्थावां प्रखंडों के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (बीईओ) और ब्लॉक एजुकेशन प्रोग्राम (बीईपी) संभाग प्रभारी शिवपूजन ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

जिला शिक्षा कार्यालय ने 4 सितंबर को ही सभी नामांकित बच्चों को शत-प्रतिशत पाठ्यपुस्तकें वितरित करने का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही दो दिनों के भीतर वितरण का प्रमाण-पत्र जमा करने का निर्देश भी दिया गया था। लेकिन अस्थावां, हरनौत और हिलसा प्रखंडों में अब तक किताबें वितरित नहीं हो सकीं, न ही संबंधित अधिकारियों ने इस संबंध में कोई प्रतिवेदन जमा किया। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए डीईओ ने जांच के आदेश दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीओ समग्र शिक्षा मो. शाहनवाज ने संबंधित प्रखंडों के बीईओ और बीईपी संभाग प्रभारी से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी विद्यालयों में पाठ्यपुस्तकें और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण तत्काल सुनिश्चित किया जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला कार्यालय को सौंपी जाए। डीपीओ ने इसे अधिकारियों की घोर लापरवाही करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संभाग प्रभारी शिवपूजन ठाकुर द्वारा पाठ्यपुस्तक वितरण के अनुश्रवण में भी लापरवाही बरती गई। डीपीओ ने स्पष्ट किया कि इस तरह की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों को समय पर सभी संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। इस तरह की लापरवाही से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

पुस्तकों की अनुपलब्धता के कारण अभिभावकों और शिक्षकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। कई अभिभावकों ने बताया कि अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू होने के बावजूद बच्चों को किताबें नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि बिना किताबों के पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

नालंदा जिला शिक्षा विभाग ने हमेशा से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समय पर संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। डीईओ आनंद विजय ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रत्येक बच्चे को समय पर किताबें और अन्य जरूरी सामग्री मिले। इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा।

डीपीओ ने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर पाठ्यपुस्तक वितरण का कार्य पूरा नहीं हुआ और संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचने के लिए अनुश्रवण तंत्र को और सख्त करने की बात कही गई है।

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