तकनीकनालंदाबिग ब्रेकिंगबिहार शरीफशिक्षा

बिहार में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति रद्द, 1अगस्त से लागू होंगे नए नियम

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदेश भर में सभी कोटि के सरकारी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति को 31 जुलाई तक रद्द करने का आदेश जारी किया है। इस कदम के साथ ही शिक्षक प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अब नए नियमों के तहत 1 अगस्त से सभी प्रतिनियुक्तियाँ केवल इ-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से की जाएँगी। आइए, इस नीति के प्रमुख बिंदुओं और इसके संभावित प्रभावों पर नज़र डालें।

शिक्षा विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और केंद्रीकृत करने का प्रयास किया गया है। यहाँ कुछ मुख्य बिंदु हैं-

180 दिन की अवधि: अब शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति अधिकतम 180 दिनों के लिए होगी। इससे लंबी अवधि की प्रतिनियुक्तियों पर रोक लगेगी, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

इ-शिक्षाकोष पोर्टल का उपयोग: सभी प्रतिनियुक्तियाँ अब इस पोर्टल के माध्यम से होंगी। शिक्षकों को पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्रतिनियुक्ति आदेश की सूचना एसएमएस के जरिए प्राप्त होगी।

उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया: प्रतिनियुक्त शिक्षकों को इ-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से अपने प्रतिनियुक्त विद्यालय से ही उपस्थिति दर्ज करानी होगी। ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ जैसी प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।

प्रशिक्षण के लिए विशेष व्यवस्था: प्रशिक्षण के लिए बल्क डेपुटेशन की सुविधा दी जाएगी और शिक्षक प्रशिक्षण स्थल से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।

प्रधानाध्यापकों पर रोक: पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं की जाएगी, जिससे स्कूलों में नेतृत्व की निरंतरता बनी रहे।

जिला शिक्षा पदाधिकारी की भूमिका: डीइओ वास्तविक आवश्यकता के आधार पर प्रतिनियुक्ति की अवधि तय करेंगे, जिससे स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

शिक्षा विभाग का यह कदम प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इ-शिक्षाकोष पोर्टल के उपयोग से प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और अनावश्यक देरी को रोका जा सकेगा। साथ ही 180 दिन की सीमा से यह सुनिश्चित होगा कि शिक्षक अपने मूल स्कूलों में नियमित रूप से उपलब्ध रहें, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

इस नीति के कई सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। एक ओर डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे।

दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता और तकनीकी जानकारी की कमी इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती है। शिक्षकों का कहना है कि बार-बार प्रतिनियुक्ति रद्द करने और नए सिरे से आवेदन करने की प्रक्रिया उनके लिए अतिरिक्त बोझ हो सकती है।

एक शिक्षक ने बताया कि नए नियमों से प्रक्रिया तो व्यवस्थित होगी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पोर्टल का उपयोग करना आसान नहीं है। कई शिक्षकों को तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।

वहीं एक अन्य शिक्षक ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह नीति स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करेगी, जो बच्चों के लिए फायदेमंद है।

बहरहाल, बिहार शिक्षा विभाग का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालाँकि इसके सफल कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर पर समुचित प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी। क्या यह नीति बिहार की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ कर पाएगी? यह तो समय ही बताएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.