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डिजिटल क्रांति की पहल: नालंदा के इन 5 स्कूलों में बच्चों का ऑनलाइन अटेंडेंस शुरु

Digital revolution initiative: Online attendance of children started in these 5 schools of Nalanda
Digital revolution initiative: Online attendance of children started in these 5 schools of Nalanda

अगर डिजिटल क्रांति का यह प्रयोग सफल रहा तो यह डिजिटल शिक्षा को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा। इसका पूरे नालंदा जिले में इसका विस्तार किया जा सकता है…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कक्षा 3 के छात्रों की उपस्थिति (अटेंडेंस) अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को विशेष रूप से टैबलेट प्रदान किए गए हैं। जिनकी मदद से वे प्रतिदिन छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे।

शिक्षा विभाग ने इस परियोजना को प्रायोगिक तौर पर छह जिलों के अलग-अलग प्रखंडों के पांच विद्यालयों में लागू किया है। चयनित स्कूलों में मध्य विद्यालय धोबी बिगहा (अस्थावां), मध्य विद्यालय श्रृंगारहाट (बिहारशरीफ), मध्य विद्यालय मुढ़ारी (हरनौत), प्राथमिक विद्यालय करीमपुर (राजगीर) और प्राथमिक विद्यालय रूपसपुर (चंडी) शामिल हैं।

कैसे होगी उपस्थिति दर्ज? कक्षा 3 के वर्ग शिक्षक प्रतिदिन पहली घंटी में टैबलेट के माध्यम से सभी छात्रों की उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज करेंगे। इसके अतिरिक्त वे कक्षा की तस्वीरें लेकर भी अपलोड करेंगे। ताकि बच्चों की नियमितता और शिक्षा की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके।

शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षणः ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण में उन्हें न केवल हाजिरी दर्ज करने, बल्कि कक्षा के विभिन्न विषयों की प्रगति को पोर्टल पर अपलोड करने की भी विधि सिखाई गई है। प्रत्येक माह की समाप्ति पर शिक्षक विषयवार पढ़ाए गए पाठों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करेंगे। जिससे पढ़ाई की समीक्षा ऑनलाइन हो सकेगी।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का प्रयासः शिक्षा विभाग के अनुसार इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल परिणाम आने पर इसे जिले के अन्य स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। क्योंकि इससे छात्रों की नियमित उपस्थिति, पढ़ाई की निगरानी और शिक्षकों की जवाबदेही तय की जा सकेगी।

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