बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला प्रशासन ने बरसात के मौसम में बढ़ते सर्पदंश के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को सतर्क और सक्रिय करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्पदंश के मामलों में त्वरित और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के मरीजों का समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए, सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें।
सिविल सर्जन ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
नालंदा जिला औषधि भंडार में 254, नालंदा सदर अस्पताल में 200, हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में 350, और राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल में 218 एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इसके अलावा, जिले के विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों जैसे- एकंगरसराय (120), गिरियक (40), रहुई (30), इस्लामपुर (55), सरमेरा (75), अस्थावां (50), कल्याण बिगहा (55), चंडी (50), बेन (51), बिहारशरीफ (12), बिंद (55), हरनौत (50), हिलसा (15), करायपरशुराय (50), कतरीसराय (44), नगरनौसा (25), नूरसराय (50), परवलपुर (50), सिलाव (50), और थरथरी (25) में भी एंटी-वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
जिला प्रशासन ने न केवल उपचार की व्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि जनता को सर्पदंश से बचाव के लिए जागरूक करने पर भी ध्यान दिया है। सिविल सर्जन ने लोगों से अपील की कि वे निम्नलिखित सावधानियां बरतें-
जमीन पर न सोएं: बरसात के मौसम में सांप अक्सर घरों में या नम स्थानों पर आ जाते हैं।
मलबों और छेदों के पास सावधानी बरतें: दीवारों, बिलों या मलबों के आसपास काम करते समय विशेष ध्यान रखें।
रात में जूते पहनें: रात के समय पांव को जूतों से ढककर चलें।
शांत रहें: सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं, क्योंकि हिलने-डुलने से जहर तेजी से फैल सकता है।
तुरंत अस्पताल जाएं: सर्पदंश को हमेशा गंभीरता से लें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं।
घायल अंग को स्थिर रखें: काटे गए अंग को हिलाने से बचें और उसे हृदय के स्तर से नीचे रखें।
जहर निकालने की कोशिश न करें: काटने की जगह को चूसने, चीरा लगाने या कसकर पट्टी बांधने जैसे उपायों से बचें।
मंत्र या तांत्रिक पर भरोसा न करें: सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी उपचार एंटी-वेनम इंजेक्शन है, जो केवल डॉक्टर द्वारा दिया जा सकता है।
सिविल सर्जन ने यह भी स्पष्ट किया कि एंटी-वेनम इंजेक्शन केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अफवाहों और अंधविश्वासों से बचने की सलाह दी।
जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नालंदा जिले में सर्पदंश से किसी की जान न जाए। स्वास्थ्य विभाग को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर मरीज को समय पर उपचार मिले। आम जनता सर्पदंश की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
