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‘डॉग बाबू’ का निवास प्रमाण पत्र, प्रशासनिक लापरवाही या हास्यपूर्ण चूक?

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के पटना जिलांतर्गत मसौढ़ी अंचल में निवास प्रमाण पत्र को लेकर एक ऐस मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान किया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी हंगामा मचा दिया है। एक कुत्ते के नाम पर निवास प्रमाण पत्र जारी हो गया, जिसका नाम है ‘डॉग बाबू’, पिता का नाम ‘कुत्ता बाबू’, माता का नाम ‘कुतिया बाबू’ और पता मोहल्ला काउलीचक, वार्ड नंबर 15, नगर परिषद मसौढ़ी।

'Dog Babu's' residence certificate, administrative negligence or comical lapse?
‘Dog Babu’s’ residence certificate, administrative negligence or comical lapse?

इस प्रमाण पत्र की संख्या BRCCO/2025/15933581 है। यह वही दस्तावेज है, जिसे बिहार में SIR (स्पेशल इन्फ्रास्ट्रक्चर रजिस्टर) में मान्य किया जा रहा है, जबकि आधार और राशन कार्ड को कई बार ‘फर्जी’ करार दिया जाता है।

सोशल मीडिया माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर Yogendra Yadav (@_YogendraYadav) ने इस घटना को साझा करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने इसे हास्य और आश्चर्य के मिश्रण के साथ देखा।

कोई इसे बिहार की अनोखी कहानी बता रहा है तो कोई इसे सरकारी सिस्टम की लापरवाही का सबूत मान रहा है। आम लोग, जो निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, इस घटना को सुनकर हैरान हैं कि आखिर एक कुत्ते का प्रमाण पत्र इतनी आसानी से कैसे बन गया?

वहीं District Administration Patna (@dm_patna) ने तुरंत इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, मसौढ़ी अंचल में ‘डॉग बाबू’ के नाम से जारी निवास प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया है। साथ ही आवेदक, कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रमाण पत्र जारी करने वाले पदाधिकारी के खिलाफ स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

अनुमंडल पदाधिकारी मसौढ़ी को 24 घंटे के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषी कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अंचलाधिकारी प्रभात रंजन ने इसे सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़ का गंभीर मामला बताया और कहा कि RTPS पोर्टल और राजस्व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।

मसौढ़ी के स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे मजाक के रूप में देख रहे हैं तो कुछ का मानना है कि यह प्रशासनिक लापरवाही का चरम उदाहरण है।

जहां एक ओर लोग लोग महीनों दौड़ते हैं एक कागज बनवाने के लिए और यहाँ कुत्ते के नाम पर प्रमाण पत्र बन गया? यह तो हद है! दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस खबर ने लोगों को हँसने का मौका भी दिया है, जहाँ मीम्स और चुटकुले वायरल हो रहे हैं।

वेशक यह घटना केवल हास्य का विषय नहीं है, बल्कि यह बिहार के प्रशासनिक सिस्टम में खामियों को उजागर करती है। RTPS पोर्टल, जिसका उपयोग निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी करने के लिए किया जाता है, उसमें ऐसी चूक कैसे हो सकती है? क्या यह केवल एक मजाक था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है? क्या यह घटना सरकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठाती?

बहरहाल यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाएँ कितनी जटिल हैं, जबकि ऐसी लापरवाही आसानी से सामने आ जाती है। इस मामले की गहन जाँच हो और भविष्य में ऐसी घटनाएँ न दोहराई जाएँ।

आपके क्या विचार हैं? क्या ‘डॉग बाबू’ की यह कहानी एक हास्यपूर्ण चूक है या सिस्टम में सुधार की जरूरत का संकेत? हमें अपने विचार कमेंट में बताएँ!

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