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डॉ. भारती ने मंगल ग्रह पर लहराया हिलसा का परचम, ढूंढा अनोखा क्रेटर

नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा ज्ञान की भूमि है। स्वर्णिम इतिहास की जमीन है। यहां की प्रतिभाएं हर दिशा में अपने झंडे लहराते हैं और अपने हौसलों की उड़ान से दुनिया में मिसाल कायम करते आ रहे हैं।

एक ऐसा ही उदाहरण के रुप में नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल के रेड़ी गांव निवासी डॉ. राजीव रंजन भारती उभरकर सामने आए है। वे भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की इकाई अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में विज्ञानी हैं।

कहते हैं कि गत दिनों उन्होंने मंगल ग्रह पर एक अनोखा क्रेटर ढूंढ निकाला है और उसकी विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत की है। मंगल पर लगभग 10 किमी चौड़े गड्ढे में जमा तलछट वहां बड़ी मात्रा में पानी का प्रमाण है।

डॉ. भारती के अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने भी स्वीकार किया और इसे ग्रह विज्ञान की बड़ी खोज मानते हुए क्रेटर का नाम ही उनकी पैतृक भूमि ‘हिलसा’ रख दिया।

डा. भारती बताते हैं कि इस क्रेटर को ढूंढने एवं विस्तृत अध्ययन में उन्हें करीब तीन साल लग गए। दो और क्रेटर ढूंढे गए हैं, जिनके नाम अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की सिफारिश पर अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (आइएयू) कार्य समूह ने ‘लाल’ व ‘मुरसान’ क्रेटर रखे हैं।

वहीं हिलसा क्रेटर लगभग 10 किलोमीटर चौड़ा गड्ढा है और लाल क्रेटर के रिम के पश्चिमी किनारे पर स्थित है।

बकौल डॉ. भारती, मंगल ग्रह पर थारिस ज्वालामुखी क्षेत्र में लाल क्रेटर का पूरा क्षेत्र लावा से ढंका हुआ है। इस क्रेटर में लावा के अलावा अन्य सामग्रियों के भू भौतिकीय साक्ष्य हैं। क्रेटर की उप सतह में 45 मीटर मोटी तलछट जमा है।

बता दें कि डॉ. भारती की प्रारंभिक शिक्षा पटना में हुई। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से मैट्रिक एवं मगध विश्वविद्यालय से स्नातक किया। उसके बाद पटना विश्वविद्यालय से पीजीडीसीए की डिग्री हासिल की। फिर एमडीयू, रोहतक से कंप्यूटर विज्ञान में एमएससी की।

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Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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