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इन 18 जिलों के DEO की सुस्ती से शिक्षा विभाग नाराज, जानें पूरा मामला

Education department is angry with the sluggishness of DEOs of these 18 districts, know the whole matter
Education department is angry with the sluggishness of DEOs of these 18 districts, know the whole matter

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में प्रथम सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 10,458 अभ्यर्थियों के आधार सत्यापन में धीमी प्रगति के चलते शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। कई जिलों में सत्यापन प्रक्रिया में नाम, जन्मतिथि और आधार कार्ड की गलत प्रविष्टियों के कारण रुकावटें आई हैं। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का सत्यापन पूरा नहीं हो सका है। इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षा विभाग ने पुनः मौका दिया, लेकिन फिर भी 18 जिलों में 50 प्रतिशत से भी कम सत्यापन हो पाया है।

47% सत्यापन की सफलता पर माध्यमिक निदेशक ने जताई नाराजगीः माध्यमिक निदेशक योगेंद्र सिंह ने इस धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए संबंधित 18 जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को नोटिस जारी किया है और कार्य में तेजी लाने की सख्त चेतावनी दी है।

निदेशक के अनुसार अब तक लंबित मामलों में केवल 47 प्रतिशत ही सत्यापन सफलता से पूरे हुए हैं। कुल 10,458 अभ्यर्थियों में से 4,894 मामले डीपीओ स्तर पर भेजे गए थे, जिनमें से डीईओ ने केवल 3,098 मामलों को ही मंजूरी दी है। जबकि 1,781 मामले अभी भी लंबित हैं। इसके अतिरिक्त 5,564 मामलों में कोई प्रगति नहीं हुई है, जो विभाग की चिंता का कारण है।

आधार सत्यापन में इन जिलों में सबसे खराब प्रदर्शनः जिन जिलों में सत्यापन कार्य की प्रगति सबसे खराब रही। इनमें सीतामढ़ी और मुंगेर सबसे निचले पायदान पर हैं। जहां एक प्रतिशत भी प्रगति नहीं हुई है। इसके अलावा भोजपुर, अरवल, कैमूर, अररिया और सारण में केवल 10 प्रतिशत सत्यापन हो पाया है।

मधेपुरा, पटना, जहानाबाद और सुपौल में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत के आसपास है। जबकि बेगूसराय, सहरसा, जमुई, गया, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और किशनगंज जैसे जिलों में 21 से 30 प्रतिशत ही सत्यापन हो सका है। वहीं गोपालगंज, मधुबनी, सीवान, बक्सर और लखीसराय में यह आंकड़ा 31 से 50 प्रतिशत के बीच रहा।

इन जिलों ने किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनः वहीं सत्यापन में सबसे संतोषजनक प्रदर्शन बांका, कटिहार, वैशाली, औरंगाबाद, और रोहतास जिलों का रहा है। जहां 91 से 99 प्रतिशत तक सत्यापन कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। इन जिलों की तेजी से अन्य जिलों के अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है।

कार्रवाई की चेतावनीः माध्यमिक निदेशक ने यह साफ कर दिया है कि अगर जिलों में सत्यापन प्रक्रिया में तेजी नहीं आई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह नोटिस शिक्षा विभाग के लिए एक अहम कदम है। ताकि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया को भी पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

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