नालंदा में शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान, 102 स्कूल बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग ने नालंदा जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में  एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। जिले के सभी 20 प्रखंडों से चयनित कुल 102 विद्यालयों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य चयनित स्कूलों को मॉडल विद्यालय के रूप में तैयार करना है, ताकि जिले के अन्य विद्यालय भी उनसे प्रेरणा लेकर अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें।

योजना के तहत प्रत्येक प्रखंड से औसतन पांच विद्यालयों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि राजगीर प्रखंड से सर्वाधिक 7 विद्यालयों का चयन किया गया है, जो इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रति बेहतर संभावनाओं और उपलब्ध संसाधनों को दर्शाता है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसके लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षण सामग्री तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि चयनित विद्यालयों में भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल, खेल मैदान और विद्युत व्यवस्था को आधुनिक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही विद्यालयों को आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और इंटरनेट सुविधा से लैस किया जाएगा। ताकि छात्रों को तकनीक आधारित शिक्षा का सीधा लाभ मिल सके।

डीईओ ने कहा कि डिजिटल शिक्षण सामग्री और स्मार्ट क्लास के माध्यम से न केवल पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा, बल्कि बच्चों में नवाचार, शोध और तार्किक सोच को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षक भी अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षण कार्य कर सकेंगे।

विद्यालयों का चयन शैक्षणिक प्रदर्शन, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर किया गया है। आने वाले समय में इन विद्यालयों की नियमित समीक्षा की जाएगी। ताकि तय लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चयनित विद्यालयों में एसएस बालिका प्लस टू हाई स्कूल, कन्या हाई स्कूल सोहसराय, नालंदा कॉलेजिएट प्लस टू हाई स्कूल, हाई स्कूल मोहम्मदपुर, आरडीएच प्लस टू हाई स्कूल राजगीर, यूएचएस मालती, एमएस बेलछी, एमएस तुंगी, एमएस नेपुरा, एमएस बहादुरपुर, हाई स्कूल कल्याण बिगहा, हाई स्कूल गोनावां पोआरी सहित कुल 102 विद्यालय शामिल हैं।

इन विद्यालयों को प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। जिले के अन्य स्कूलों के छात्रों को यहां शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। ताकि वे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित हो सकें और अपने विद्यालयों में भी उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित हों।

हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में डीईओ ने सभी चयनित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आधारभूत संरचना, शिक्षकों की स्थिति, शैक्षणिक संचालन और संसाधनों से संबंधित अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

बैठक में कई प्रधानाध्यापकों ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनके विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव नामांकन वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है।

इस पहल से नालंदा जिले में न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है, बल्कि यह योजना आने वाले समय में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करेगी।

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