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इस्लामपुर नगर परिषद की कार्रवाई के खिलाफ फुटपाथी दुकानदारों की हड़ताल

हिलसा/इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर नगर परिषद द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के विरोध में फुटपाथी सब्जी और फल विक्रेताओं का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। नगर परिषद की कार्रवाई से नाराज सैकड़ों फुटपाथी दुकानदारों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिसका असर अब शहर के आम जनजीवन और बाजार व्यवस्था पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

शहर के मुख्य बाजार, चौक-चौराहों और सड़कों के किनारे वर्षों से दुकान लगाकर अपनी जीविका चलाने वाले दर्जनों विक्रेताओं को हाल ही में हटाया गया। दुकानदारों का आरोप है कि नगर परिषद ने बिना किसी पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के यह कार्रवाई की, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

हड़ताल पर बैठे विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से एक ही स्थान पर सब्जी एवं फल की दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। अचानक हटाए जाने के बाद उनकी आय पूरी तरह बंद हो गई है। एक दुकानदार ने कहा कि हम गरीब लोग हैं। रोज कमाते हैं, तभी घर चलता है। बिना दूसरी जगह दिए दुकान हटाना हमारे साथ अन्याय है।

दुकानदारों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई केवल छोटे और फुटपाथी व्यापारियों पर की जा रही है, जबकि बड़े और स्थायी अतिक्रमणों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

हड़ताली विक्रेताओं की मुख्य मांग है कि नगर परिषद इस्लामपुर में एक स्थायी सब्जी मंडी या वेंडिंग जोन का निर्माण करे, ताकि वे नियमानुसार व्यवस्थित ढंग से अपना व्यवसाय संचालित कर सकें। विक्रेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

इस हड़ताल का असर शहर के विभिन्न बाजारों में देखने को मिल रहा है। सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित होने से कई स्थानों पर कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आम लोगों और गृहिणियों को सब्जी खरीदने के लिए दूर-दराज के बाजारों का रुख करना पड़ रहा है। कई प्रमुख स्थानों पर ठेले और फुटपाथ खाली नजर आ रहे हैं, जिससे बाजार की रौनक भी फीकी पड़ गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त करना जरूरी है, लेकिन गरीब दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक थी। फिलहाल नगर परिषद की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

अब विक्रेताओं और आम जनता की नजरें नगर परिषद के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह हड़ताल लंबी खिंच सकती है और शहर की बाजार व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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