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EOU ने NEET पेपर लीक के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को दबोचा, जानें डिटेल

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक सनसनीखेज कार्रवाई में NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया उर्फ लूटन मुखिया को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी बीती देर रात पटना के सगुना मोड़ इलाके में एक फ्लैट से की गई। जहां वह 11 महीनों से फरार होने के बाद छिपा हुआ था। बिहार पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 3 लाख रुपये का इनाम घोषित किया।

बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा थाना क्षेत्र के शाहपुर बलवा गांव का निवासी संजीव मुखिया मई 2024 में NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक के बाद से फरार था। जांच एजेंसियों ने उसे पकड़ने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और नेपाल तक छापेमारी की। लेकिन वह हर बार पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा। सूत्रों के मुताबिक मुखिया नेपाल में भी छिपा हुआ था। जिससे उसकी गिरफ्तारी और भी चुनौतीपूर्ण हो गई थी।

बिहार पुलिस ने अप्रैल 2024 में मुखिया की गिरफ्तारी के लिए 3 लाख रुपये और उसके दो सहयोगियों शुभम कुमार और राजकिशोर कुमार के लिए 1-1 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इसके अलावा मार्च 2025 में आर्थिक अपराध इकाई ने मुखिया के घर पर एक घोषणा पत्र चस्पा किया था। जिसमें उसकी संपत्ति जब्त करने की चेतावनी दी गई थी।

पटना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि संजीव मुखिया सगुना मोड़ के एक फ्लैट में छिपा हुआ है। इसके आधार पर EOU और STF की संयुक्त टीम ने देर रात छापेमारी की और उसे धर दबोचा। EOU के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) नैयर हसनैन खान ने बताया कि मुखिया एक संगठित गिरोह का सरगना था, जो बिहार और अन्य राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं को अंजाम देता था। उसकी गिरफ्तारी इस मामले में एक बड़ी सफलता है।

बता दें कि NEET-UG 2024 परीक्षा, जो 5 मई 2024 को देशभर के 4750 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। उसमें पेपर लीक की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पटना पुलिस ने सबसे पहले इस घोटाले का खुलासा किया, जब एक निजी स्कूल में 20-25 छात्रों को परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। जांच में पता चला कि प्रत्येक छात्र से 30-40 लाख रुपये वसूले गए थे। इस मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस फिर EOU और अंत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी।

संजीव मुखिया का नाम केवल NEET-UG पेपर लीक तक सीमित नहीं है। वह पिछले दो दशकों से विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक में शामिल रहा है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड 2010 से शुरू होता है, जब उसका नाम पहली बार पेपर लीक के एक मामले में सामने आया था। 2016 में उसे उत्तराखंड में मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उसे दो महीने में जमानत मिल गई थी।

मुखिया पर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE 3.0), बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (2023) और हरियाणा में पशु चिकित्सक और अंग्रेजी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक का भी आरोप है। इनमें से कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को रद्द करना पड़ा था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है, क्योंकि उसकी संपत्ति उसकी आय से 144% अधिक पाई गई थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार मुखिया एक अंतरराज्यीय गिरोह का संचालन करता था, जिसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के अपराधी शामिल थे। यह गिरोह परीक्षा प्रश्नपत्रों को छपाई, पैकेजिंग या परिवहन के दौरान हासिल कर लेता था और फिर इसे सॉल्वर गैंग के जरिए उम्मीदवारों तक पहुंचाता था। मुखिया के बेटे शिव कुमार, जो पटना मेडिकल कॉलेज से स्नातक हैं, वह BPSC पेपर लीक मामले में जेल में हैं। इसके अलावा उसका भांजा रॉकी उर्फ राकेश रंजन भी इस मामले में गिरफ्तार हो चुका है।

संजीव मुखिया की पत्नी ममता देवी भुतहाखार पंचायत की पूर्व मुखिया रह चुकी हैं और 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने मुखिया के कथित राजनीतिक कनेक्शन को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा है। RJD ने आरोप लगाया कि मुखिया को संरक्षण देने में सत्ताधारी दल के नेता शामिल हैं।

अब संजीव मुखिया की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और CBI को उम्मीद है कि इस मामले में कई और खुलासे होंगे। EOU के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुखिया से पूछताछ में उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इस मामले ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की जरूरत है।

संजीव मुखिया की गिरफ्तारी न केवल NEET-UG पेपर लीक मामले में एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि यह उन लाखों छात्रों के लिए भी न्याय की उम्मीद जगाती है, जिनकी मेहनत और सपनों को इस घोटाले ने प्रभावित किया था। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस गिरफ्तारी से पेपर लीक के इस गोरखधंधे का पूरी तरह खात्मा हो पाएगा।

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