दाखिल खारिज के लिए अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे किसान, यहाँ बिना चढ़वा नहीं होता कोई काम

“2023-24 में दाखिल खारिज के लिए प्रखंड में छह हजार 7354 आवेदन मिले। इसमें से 38 फीसदी यानि 2 हजार 807 आवेदन रद्द किया गया। महज 59 फीसदी मामलों का ही निपटारा हुआ। जबकि, 228 मामले सीओ व हल्का कर्मिचारी के स्तर पर लंबित हैं…

करायपरसुराय (नालंदा दर्पण)। करायपरसुराय अंचल क्षेत्र में भूमि से संबंधित परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जबसे सारे कामकाज ऑनलाइन हुए हैं, तब से रसीद कटाने के लिए थोड़ी राहत मिली है। लेकिन, रसीद में गड़बड़ियों की भरमार है। दाखिलखारिज के लिए किसान व रैयत रोजाना अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। कई रैयतों की रसीद पर गलत खाता खसरा दर्ज है। तो, कई पर जीरो-जीरो दर्ज है।

हालांकि, रैयत परिमार्जन पोर्टल पर सुधार के लिए लगातार आवेदन दे रहे हैं। बावजूद मामले नहीं सुलझ रहे। परिमार्जन का समय अवधि  30 से 45 दिन है। 45 दिन बीत्त जाने के बाद भी कुछ आवेदनों का निष्पान नही होता है।

किसान दीपक कुमार, अमरेश कुमार ने कहा कि अंचल में खाता खेसरा सुधारने में चढ़वा देना पड़ता है। जो किसान चढ़वा नही देते है, उनको अंचल कार्यलय का चक्कर लगना पड़ता है। सभी हल्का कर्मचारी अपना अपना एजेंट रखे हुए है। कर्मचारी अपना पल्ला झाड़ने हुए अपना एजेंट के हवाले कर देता है।

सुधार के लिए परिमार्जन पर बार बार आवेदन देने के बाद भी लंबित मामलों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कई रैयतों की रसीद पर खाता-खसरा का गलत ब्योरा दर्ज है। कई की एंट्री में जीरो जीरो लिखा गया है। जब किसी रैयत या भूस्वामी की रसीद में दो, चार या आठ डिसमील जमीन दिख रही है, तब उस जमीन का ब्यौरा उसमें दर्ज क्यों नहीं किया गया। इस जीरो जीरो का मतलब क्या है?

ऑफ लाइन काम बंद होने से बढ़ी परेशानी:  सुधार या म्युटेशन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था से आवेदन डालना आसान हो गया। लेकिन, ऑफलाइन बंद होने से भूस्वामियों की परेशानी खत्म नहीं हुई। रिकार्ड में भारी गड़बड़ी के चलते रैयतों व किसानों को भू-राजस्व जमा करने में बहुत परेशानी आ रही है। हद तो यह कि कई रैयतों का सब कुछ ठीक होने के बावजूद पोर्टल पर उनका राजस्व नहीं कट रहा।

करायपरसुराय के किसान राजेन्द्र प्रसाद, सुरेश प्रसाद, विजय कुमार ने बताया कि सुधार के लिए कई बार चक्कर लगा चुके हैं। अब तक सुधार नहीं हुआ। एक रसीद हर तरह से ठीक है। सर्वर सही नहीं होने से ऑनलाइन भुगतान नहीं हो रहा है। इसके लिए कई बार साबइर कैफे का भी चक्कर लगा चुके हैं।

डाटा इंट्री में है गड़बड़ी:  करायपरसुराय के सीओ मणिकांत कुमार ने बताया कि डाटा इंट्री में गड़बड़ी है। रैयत अपनी समस्याओं के लिए आवेदन दे रहे हैं। उसकी जांच कर मामलों का निपटारा किया जा रहा है। ‘परिमार्जन के माध्यम से गड़बड़ियों को ठीक किया जा रहा है। ऑनलाइन होने से रैयतों को सुविधा तो हुई है।

उन्होंने कहा कि पहले लोगों को रसीद कटाने के लिए प्रखंड मुख्यालय आना पड़ता था। अब घर बैठे ही भू-लगान बिहार के वेबसाइड पर जाकर अपना रसीद खुद कटा सकते हैं। इसे किसी भी एंड्रॉयड फोन से भी आसानी से काटा जा सकता है। इसके लिए किसी तरह का कोई शुल्क भी नहीं लगता है।

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