Home एकंगरसराय लोकायन नदी में जलस्तर का उतार-चढ़ाव से किसान लोग चिंतित

लोकायन नदी में जलस्तर का उतार-चढ़ाव से किसान लोग चिंतित

Farmers are worried due to the fluctuation in water level in Lokayan river
Farmers are worried due to the fluctuation in water level in Lokayan river

हिलसा (नालंदा दर्पण)। लोकायन नदी नालंदा जिले के एक बड़े क्षेत्र की जीवनरेखा है।  इन दिनों इस नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव किसानों के बीत चिंता का विषय बनी हुई है। शनिवार सुबह से शुरू हुआ यह बदलाव रविवार से और गंभीर हो गया। भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक तीन फीट बढ़ गया और खतरे के निशान को पार कर गया। इस स्थिति ने न केवल स्थानीय किसानों और निवासियों में चिंता बढ़ा दी है, बल्कि प्रशासन को भी पूरी तरह सतर्क कर दिया है।

बता दें कि पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने लोकायन नदी के जलस्तर को और उग्र कर दिया है। शनिवार शाम तक जलस्तर में मामूली कमी देखी गई थी, लेकिन रविवार सुबह हुई भारी बारिश ने स्थिति को और जटिल कर दिया।

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार अगले कुछ घंटों में और बारिश होने की संभावना है, जिससे जलस्तर के और बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। खासकर एकंगरसराय प्रखंड के राढ़िल गाँव के छिलका इलाके में नदी का बहाव तेज हो गया है। यहाँ पानी को नियंत्रित ढंग से छोड़ा जा रहा है, ताकि आसपास के गाँवों में बाढ़ की स्थिति से बचा जा सके।

लोकायन नदी नालंदा जिले के लिए केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि यहाँ के एक बड़े हिस्से की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह नदी नालंदा के गाँवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है और स्थानीय किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। लेकिन हर साल मानसून के दौरान यह नदी उग्र रूप धारण कर लेती है, जिससे आसपास के गाँवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

इतिहासकार डॉ. सुरेंद्र शर्मा बताते हैं कि लोकायन नदी का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। यह नदी कभी इस क्षेत्र के लिए वरदान थी, लेकिन बदलते पर्यावरण और अनियोजित विकास ने इसे कई बार अभिशाप बना दिया है। नदी के तटबंधों की मरम्मत और रखरखाव पर और ध्यान देने की जरूरत है।

हालांकि जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने तटबंधों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। एकंगरसराय प्रखंड के कई हिस्सों में तटबंधों पर मिट्टी और बालू की बोरियों से मजबूती प्रदान की जा रही है।

आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमने सभी जरूरी उपाय किए हैं। नाव, रस्सियां और राहत सामग्री तैयार रखी गई है। अगर स्थिति और गंभीर होती है तो हम तुरंत कार्रवाई करेंगे।

प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी के किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों को तुरंत सूचित करें। इसके साथ ही अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है।

हालांकि लोकायन नदी में जलस्तर का उतार-चढ़ाव कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन इस बार की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या तटबंधों की स्थिति पहले से बेहतर की जा सकती थी? क्या मौसम की चेतावनियों को और गंभीरता से लिया जाना चाहिए था?

पर्यावरणविद् सुनिता प्रसाद का कहना है कि हमें नदी के आसपास के पर्यावरण को संरक्षित करने और तटबंधों को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ बनानी होंगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी समझना होगा।

इस संकट के बीच गाँववासियों ने भी एकजुटता दिखाई है। राढ़िल गाँव के युवा स्वयंसेवकों ने तटबंधों पर निगरानी के लिए प्रशासन के साथ सहयोग शुरू किया है। मीना देवी कहती हैं कि हम सब मिलकर इस मुश्किल का सामना करेंगे। यह हमारा गाँव है, और हम इसे बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।

बहरहाल, लोकायन नदी में जारी उथल-पुथल नालंदा के निवासियों के लिए एक चुनौती तो है, लेकिन उनकी एकजुटता और प्रशासन की सतर्कता इस संकट से निपटने की उम्मीद जगाती है। जैसे-जैसे बारिश का दौर जारी है, सभी की निगाहें नदी के जलस्तर और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हैं।

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