Home समस्या हिलसा नगर में जलजमाव से महामारी का खतरा, लोग त्रस्त

हिलसा नगर में जलजमाव से महामारी का खतरा, लोग त्रस्त

Waterlogging in Hilsa town poses threat of epidemic, people distressed
Waterlogging in Hilsa town poses threat of epidemic, people distressed

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बरसात का मौसम आते ही हिलसा नगर के निवासियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी गली-नाली पक्कीकरण योजना के तहत लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन सिविल कोर्ट और जेल के पश्चिम एवं उत्तर दिशा की ओर जाने वाली गलियों में जलजमाव की समस्या जस की तस बनी हुई है। ऊंची नालियों और घटिया निर्माण ने न केवल आवागमन को दूभर कर दिया है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा दिया है।

राममूर्ति नगर, सरस्वती कॉलनी, गांधीनगर और खोरमपुर जैसे मोहल्लों में पिछले छह वर्षों से जलजमाव की समस्या बनी हुई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार नगर परिषद द्वारा बनाई गई नालियां सड़क से ऊंची हैं, जिसके कारण बारिश का पानी निकल नहीं पाता। हल्की बारिश में ही गलियां दो फीट पानी से भर जाती हैं, जो तालाब का रूप ले लेती हैं। गंदे पानी की दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप आम हो गया है। कई घरों में पानी घुस चुका है, जिससे लोग मोटर पंप के सहारे पानी निकालने को मजबूर हैं।

इस गली से होकर सैकड़ों स्कूली बच्चे और स्थानीय निवासी रोजाना गुजरते हैं। छात्र-छात्राओं को जूते-चप्पल उतारकर गंदे पानी में नंगे पांव स्कूल जाना पड़ रहा है। गली में स्थित शिव मंदिर में पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कीचड़ और पानी से भरी गलियों में चलना जोखिम भरा है।

जलजमाव के कारण गलियों में गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों को डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का भय सता रहा है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

गली-नाली पक्कीकरण योजना के तहत लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन संवेदक द्वारा की गई अव्यवस्थित और घटिया निर्माण कार्य ने इस योजना को मजाक बना दिया। सड़क से ऊंची नालियां बनाने का निर्णय तकनीकी रूप से गलत साबित हुआ है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है।

निवासियों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने और नालियों की ऊंचाई को ठीक करने की मांग की है। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि नालियों को सड़क के स्तर के अनुसार पुनर्निर्माण किया जाए या वैकल्पिक जल निकासी मार्ग बनाया जाए। इसके अलावा नियमित सफाई और मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए कीटनाशक छिड़काव की भी जरूरत है।

नगर परिषद और जिला प्रशासन से इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निवासियों का कहना है कि उनकी शिकायतों को बार-बार अनसुना किया जा रहा है। इस स्थिति ने न केवल लोगों का विश्वास तोड़ा है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि क्या सरकारी योजनाएं वास्तव में जनता के हित में हैं?

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version