First publication: चंडी के छोरे सुदर्शन की ‘उसकी खुशबू से भीगे खत’ जल्द होगी प्रकाशित

चंडी (नालंदा दर्पण)। First publication: इसी दुनिया के किसी दूरस्थ कोने में लोग हैं जिन्हें फर्क नहीं पड़ता मेरे होने न होने में वहां जाना है, अपने वजूद की खबर देनी है। कुछ यहीं सपना है एक नवोदित लेखक सुदर्शन कुमार गोस्वामी की। जिनकी पहली कृति ‘उसके खुशबू से भीगे खत’ जल्द ही पाठकों की हाथ में होगी। उनकी इस किताब में प्रेम से सराबोर कविताएं-शायरी मिलेंगी। जो कविताएं, शायरी सुदर्शन के दिल में थी, उनमें से कुछ इस किताब में है,जिनसे आप जल्द ही मिलेंगे। और कुछ शायरी है, जिसे अपने पास सुदर्शन ने रख ली है, जिनसे आप तभी मिल पाएंगे, जब खुशबू से भीगे हुए खत से रूबरू हो जाएंगे।

नवोदित युवा रचनाकार सुदर्शन कुमार गोस्वामी उन गिने चुने लोगों में से एक हैं, जो एक छोटे से कस्बे के गली से निकल कर साहित्य के क्षेत्र में कदम रख रहें हैं। यूं तो सुदर्शन का जन्म एक छोटे से गांव में हुआ।

नालंदा जिले के चंडी स्थित माता चंडी मंदिर की गली में पले बढ़े, मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर संघर्ष के दिन भी उन्होंने गुजारा। भले ही स्वभाव से अंतर्मुखी स्वभाव के रहें, सुदर्शन दोस्ती का महत्व समझते हैं। तभी तो दोस्तों के बीच शरारत के लिए काफी लोकप्रिय रहे हैं। कुछ कर गुजरने की तमन्ना लेकर वह दिल्ली चले गये। लेकिन उसके बाद आंख खुली कि कोई फायदा नहीं है।

तीन महीने बाद वापस चंडी लौटकर पढ़ाई शुरू की। नालंदा के पावापुरी से इंटर और ग्रेजुएट हरनौत से किया। पांच भाई बहनों में सबसे बड़े सुदर्शन एक बार फिर नौकरी की तलाश में दिल्ली निकल गये। क्योंकि उनके पास और कोई जीविकोपार्जन का साधन नहीं है। माता-पिता चंडी बाजार में चूड़ी का एक छोटी सी दुकान चलाते आ रहें हैं।

सुदर्शन बताते हैं नौकरी करते हुए लगभग पंद्रह साल हो गए। पर मन अकेला ही रहा दिन के उजले रोशनी में तो ऑफिस में मेरा वक्त निकल जाता था। पर घर की चारदीवारी में बस कैद जैसा लगता। ऐसे में मन में अनेक विचार उमड़ते-घुमड़ते रहते। बस तभी से शुरू हुआ मन के झंझावात को उकेरने की कोशिश। जब आंख बंद करें तो दिखता था एक प्यारी सी धुंधली कोरी तस्वीर जो पता नहीं है भी कि नहीं। पर उसी अनाम तस्वीर को उन्होंने प्रेरणा माना।

वह आगे बताते हैं कि इसी बीच कहीं मैने पढ़ा कि अमृता-इमरोज और साहिर की कही अनकही किस्सों को, मैं उनसे इतना प्रभावित हुआ कि बस मेरे अंदर इमरोज को लिखने की उत्सुकता जागी बस लिखना शुरू किया। कल्पनाएं को अपना साथी समझ उसके बिछोह,प्यार, इंतजार, शिद्दत, मिलना यही सारे एहसास को समेटा करता रहा कोरे पन्नों पर।पर शायद ये लिखे एहसास को बाहर आना था बस कोशिश की है कि इसे सबके सामने लाया जाए।

सुदर्शन कुमार गोस्वामी की पहली कृति अब बस पाठकों के हाथों में पहुंचने को ही है। उनकी इस किताब को अभिलाषा प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रेम के सारे स्वरूप को अपनी लेखनी के माध्यम से बड़ी खुबसूरती से उकेरी है।

सुदर्शन इस किताब को लेकर बताते हैं, हर इंसान का कोई ना कोई शौक होता है। लिखना भी मेरे लिए ऐसा ही था। मेरी ये किताब कल्पनाओं का ऐसा सृजन है जो लोगों को जीवंत लग सकती है। अपनी कल्पनाओं में मैं डूबकर जो महसूस करता हूँ वही लिख पाता हूँ। प्यार इंतजार एक सामान्य विषय है, जिसपर हर कोई लिखता है। अंतर बस इतना है कि मैं उसे पूरी तरह कल्पनाओं में जीकर लिखता हूँ।

मैं एक बेहद भावुक इंसान हूँ। हर चीज को बहुत ही गहराई से सोचता हूँ। शायद यही वजह है कि मैं अपनी सोच को कविता का रूप दे पाया। खाली वक्त और अकेले में छिटपुट लिखते-लिखते कभी सोचा नहीं था कि किताब भी आएगी।

पर सुदर्शन का यह शौक आज उनकी पहचान बनने जा रहा है। लेखन के क्षेत्र में यह उनका पहला कदम है, लेकिन आगे आने वाले दिनों में उनकी कुछ किताबें और आएंगी। सुदर्शन एक उपन्यास पर भी काम कर रहे हैं। सुदर्शन के पास अभी भी लगभग चार सौ प्रेम से सराबोर रचनाएं हैं, जिनके बारे में वह कहते हैं कि इतने में दो और किताबें जरूर आ जाएगी।

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