
इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के इस्लामपुर नगर परिषद की बोर्ड बैठक में एक बार फिर वही हुआ जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था। यानी जमकर हंगामा, चीख-पुकार और हाई-वोल्टेज ड्रामा!
वैसे तो यह बैठक कागजों पर शहर के विकास के लिए बुलाई गई थी, लेकिन जमीन पर नजारा ऐसा था मानो कोई सत्यनारायण भगवान का कथा चल रहा हो, जहाँ सीधे परसादी (सरकारी बजट) लूटने के चक्कर में माननीय सदस्यों के बीच लठ्ठम-लठ्ठा चालू हो गया।
माल महराज के, मिर्जा खेले होली’ वाली प्रोसीडिंगः बैठक की शुरुआत ही धमाकेदार रही। वार्ड पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी और मुख्य पार्षद को घेरकर सीधे आईना दिखा दिया। पार्षदों का आरोप था कि साहब लोग अंधेर नगरी चौपट राजा वाला खेल खेल रहे हैं। जिन विकास योजनाओं का नाम तक सदन में किसी ने मुंह से नहीं निकाला, उन्हें भी प्रोसीडिंग रजिस्टर के खाते में चुपके से नत्थी कर दिया गया। पार्षदों ने साफ-साफ कहा कि यहाँ ‘माल महराज के, मिर्जा खेले होली’ वाला खेल नहीं चलने दिया जाएगा।
बहुमत गायब, फिर भी जबरदस्ती का बियाहः हंगामे का मीटर तब और बढ़ गया जब यह खुलासा हुआ कि कुछ योजनाओं को पास कराने के लिए सदन में वोटिंग के दौरान बहुमत था ही नहीं, फिर भी अधिकारियों ने अपने वीटो पावर से उसे जबरन स्वीकृत मान लिया। इसपर नाराज पार्षदों ने तंज कसते हुए पूछा कि अरे साहब! बहुमत है नहीं और योजना पास कर दिए? ई का जबरदस्ती का बियाह करा रहे हैं का?
इस ईमानदार लूट के खिलाफ वार्ड पार्षद गुड्डू कुमार, आरती देवी, सानिया गुप्ता, दिनेश पासवान और प्रतिभा सिन्हा समेत कई सदस्यों ने मोर्चा संभाल लिया। पार्षदों ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक अधिकारियों का यह ‘दाल-भात में मूसरचंद’ वाला रवैया अब नहीं झेला जाएगा।
जब माहौल लगा चटकने तो पुलिस को कूदना पड़ाः आरोप-प्रत्यारोप का दौर जब बढ़ा तो अधिकारी जी भी एकदम भभक गए। दोनों तरफ से ऐसी तीखी नोकझोंक शुरू हुई कि लगा अब कुर्सी-टेबल चटकबे करेगा। जब पानी माथा से ऊपर बहने लगा तो बेचारी इस्लामपुर थाना पुलिस को बीच में कूदना पड़ा।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को सहलाया और शांत कराते हुए मानो कहा कि अरे महाराज! चोरी ऊपर से सीनाजोरी मत करिए, थोड़ा शांत हो जाइए।
जनता बेहाल, नेता-अफसर मालामालः इस हंगामेदार हरि कीर्तन के बाद क्षेत्र की जनता एक बार फिर खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। शहर की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए बेहाल है, और इधर नगर परिषद के बंद कमरों में नेता और अफसर आपस में ही लूट के माल पर लट्ठ बजा रहे हैं।






