अपहरण बाद मजदूर की हत्या के विरोध में माले का आक्रोश मार्च
इस्लामपुर में भाकपा-माले ने निकाला विरोध मार्च; मृतक के परिजन को नौकरी, सुरक्षा और स्पीडी ट्रायल की मांग

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड कार्यालय से बुधवार को भाकपा-माले के नेतृत्व में अपहरण और हत्या की घटना के विरोध में विरोध मार्च निकाला गया। मार्च में बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों और युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा, मृतक के एक परिजन को सरकारी नौकरी, 20 लाख रुपये मुआवजा और परिवार को सुरक्षा देने की मांग कर रहे थे।
विरोध मार्च विभिन्न मार्गों से होते हुए केवी चौक पहुंचा, जहां यह सभा में तब्दील हो गया। सभा का नेतृत्व भाकपा-माले के जिला सचिव श्रीनिवास शर्मा, प्रखंड सचिव उमेश पासवान सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने किया।
एक हजार रुपये के विवाद में अपहरण और हत्या का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए माले नेताओं ने आरोप लगाया कि पपरनौसा निवासी मजदूर सुरेंद्र मांझी का एक भट्ठा मजदूर ठेकेदार और उसके सहयोगियों द्वारा कथित तौर पर अपहरण किया गया।
नेताओं के मुताबिक मजदूर को करीब एक सप्ताह तक पपरनौसा स्थित एक घर में बंधक बनाकर कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शव को नमक डालकर दफना दिया गया।
नेताओं ने दावा किया कि मृतक की पत्नी के साथ भी मारपीट की गई थी और वह किसी तरह वहां से निकलकर पुलिस को घटना की जानकारी देने में सफल हुई। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
माले नेताओं ने घटना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि यदि किसी व्यक्ति को कथित तौर पर कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई तो समय रहते पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की।
जमुई की घटना का भी उठाया मुद्दा
सभा में नेताओं ने जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा की मांग की।
माले नेताओं ने बिहार में दलितों, गरीबों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने राजगीर में दो दलित युवकों की कथित पिटाई से हुई मौत का भी उल्लेख किया और सरकार से कानून-व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
पलायन को लेकर सरकार पर निशाना
सभा में बिहार से मजदूरों के दूसरे राज्यों में जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण बिहार के मजदूर धान कटाई, ईंट-भट्ठों और ठेला-रिक्शा जैसे कामों के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे राज्य सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।
विरोध मार्च और सभा के दौरान श्रीनिवास शर्मा, उमेश पासवान, सुखसागर कुमार, रामाधीन चौहान, बिंदेश्वरी प्रसाद, महेंद्र अमरनाथ, मोहम्मद इरफान, नरेश महतो, बरखु चौधरी, अवधेश यादव, अशोक कुमार, लवकुश कुमार और जितेंद्र सिंह समेत कई पार्टी नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।






