
नालंदा दर्पण डेस्क। अपनी ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत के लिए विश्वविख्यात नालंदा जिला अब रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी एक नया मुकाम हासिल करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। नेउरा-दनियावां रेल लाइन को जल्द शुरू करने की तैयारियां जोरों पर हैं और जटडुमरी में निर्माणाधीन रेलवे जंक्शन से भी निकट भविष्य में ट्रेन सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है।
नेउरा-दनियावां रेल लाइन नालंदा और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। यह रेल खंड बिहार की राजधानी पटना को नालंदा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस रेल लाइन के शुरू होने से यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन का विकल्प मिलेगा। विशेष रूप से छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए लाभकारी होगा।
रेलवे सूत्रों के अनुसार इस रेल लाइन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब इसका विद्युतीकरण और सिग्नलिंग सिस्टम का परीक्षण चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में इस रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकता है। इस परियोजना की लागत लगभग 300 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसे भारतीय रेलवे के पूर्व मध्य रेलवे जोन के तहत विकसित किया जा रहा है।
जटडुमरी में बन रहा रेलवे जंक्शन नालंदा के रेल नेटवर्क को और मजबूत करने जा रहा है। यह जंक्शन नेउरा-दनियावां रेल लाइन को अन्य प्रमुख रेल मार्गों से जोड़ेगा। जिससे नालंदा जिला बिहार के अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगा। जटडुमरी जंक्शन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और रेलवे अधिकारियों का दावा है कि यह जंक्शन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा।
जटडुमरी जंक्शन पर यात्री सुविधाओं में वेटिंग रूम, टिकट काउंटर, स्वच्छ पेयजल और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड शामिल होंगे। इसके अलावा जंक्शन को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि भविष्य में इसे और विस्तारित किया जा सके। स्थानीय लोग इस जंक्शन को लेकर खासे उत्साहित हैं, क्योंकि इससे न केवल उनकी यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
वेशख नेउरा-दनियावां रेल लाइन और जटडुमरी जंक्शन के शुरू होने से नालंदा जिले में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह रेल लाइन स्थानीय व्यापारियों को अपने सामान को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगी। इसके अलावा पर्यटन उद्योग को भी बल मिलेगा, क्योंकि नालंदा और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी इस रेल लाइन का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। नालंदा विश्वविद्यालय पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुका है। अब और अधिक छात्रों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करेगा। रेल कनेक्टिविटी के कारण छात्रों के लिए पटना और अन्य शहरों से नालंदा आना-जाना आसान हो जाएगा।
हालांकि, इस परियोजना को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। नेउरा-दनियावां रेल लाइन के कुछ हिस्सों में भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय किसानों ने विरोध किया था। लेकिन रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने बातचीत के जरिए इन मुद्दों को सुलझा लिया है। इसके अलावा जटडुमरी जंक्शन के निर्माण में कुछ तकनीकी देरी हुई, लेकिन अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण में है।
रेलवे मंत्रालय ने नालंदा में रेल नेटवर्क को और विस्तार देने की योजना बनाई है। हाल ही में तीन नई रेल लाइनों के लिए सर्वे पूरा किया गया है और इनकी रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी गई है। इनमें इस्लामपुर-बोधगया रेल लाइन भी शामिल है, जिसके निर्माण से नालंदा और गया के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।







