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जानें 16 साल बाद दर्शन के लिए कहां क्यों रखे गए भगवान बुद्ध के दांत

Know where Lord Buddha's teeth were kept for darshan after 16 years
Know where Lord Buddha's teeth were kept for darshan after 16 years

नालंदा दर्पण डेस्क। श्रीलंका के केंद्रीय शहर कैंडी में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन ने विश्व भर के बौद्ध अनुयायियों का ध्यान आकर्षित किया है। भगवान बुद्ध के पवित्र दंत अवशेष, जो श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास का अभिन्न अंग हैं, उसे 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आम लोगों के दर्शन के लिए रखा गया है। यह आयोजन न केवल श्रीलंका के 74 प्रतिशत सिंहली बौद्ध समुदाय के लिए, बल्कि विश्व भर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार यह पवित्र अवशेष 10 दिनों तक 18 अप्रैल से 27 अप्रैल 2025 तक कैंडी के प्रसिद्ध दालदा मालिगावा (दंत अवशेष मंदिर) में दर्शन के लिए उपलब्ध रहेगा। आम लोग स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक इस अवशेष के दर्शन कर सकेंगे। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में विशेष प्रार्थनाएं और बौद्ध अनुष्ठान भी आयोजित किए जाएंगे, जो इस अवसर को और भी पवित्र बनाएंगे।

इस आयोजन की वैश्विक महत्ता को देखते हुए भारत सहित 17 देशों के राजदूतों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इन राजदूतों को कैंडी तक पहुंचाने के लिए एक विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई है, जो श्रीलंका सरकार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति सम्मान और सहयोग का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त विभिन्न देशों से हजारों बौद्ध श्रद्धालुओं के कैंडी पहुंचने की उम्मीद है, जो इस आयोजन को एक वैश्विक धार्मिक उत्सव में बदल देगा।

भगवान बुद्ध का यह दंत अवशेष श्रीलंका के लिए केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी हिस्सा है। ऐसा माना जाता है कि यह अवशेष भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद भारत से श्रीलंका लाया गया था और तब से यह दालदा मालिगावा में संरक्षित है। श्रीलंका के सिंहली बौद्ध समुदाय के लिए यह अवशेष आध्यात्मिक शक्ति और एकता का स्रोत है। हर वर्ष इस अवशेष को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाला एसाला पेराहेरा उत्सव विश्व प्रसिद्ध है, जो श्रीलंका की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

इस आयोजन के लिए कैंडी में व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर में स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की टीमें तैनात की गई हैं। श्रद्धालुओं में इस अवसर को लेकर अपार उत्साह है। क्योंकि 16 वर्षों बाद इस पवित्र अवशेष के दर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है। कई श्रद्धालु इसे अपने जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण मान रहे हैं।

वेशक यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विश्व शांति और सहिष्णुता का संदेश भी देता है। भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और समानता पर आधारित उपदेश आज भी विश्व भर में प्रासंगिक हैं। इस अवशेष के दर्शन के लिए विभिन्न देशों से आने वाले श्रद्धालु और राजदूत इस बात का प्रतीक हैं कि बौद्ध दर्शन की शिक्षाएं सीमाओं को पार कर मानवता को एकजुट करती हैं।

भगवान बुद्ध के पवित्र दंत अवशेष का यह दर्शन श्रीलंका के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ रहा है। यह आयोजन न केवल श्रीलंका के बौद्ध समुदाय के लिए, बल्कि विश्व भर के उन लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जो शांति और आध्यात्मिकता की खोज में हैं। कैंडी का दालदा मालिगावा एक बार फिर विश्व के ध्यान का केंद्र बन गया है और यह अवसर निश्चित रूप से सभी श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

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