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      संस्कृति मंत्रालय ने नालंदा के चंडी के लाल अभिनेता रविकांत सिंह को फेलोशिप के लिए चुना

      “बिहार में हाशिए पर पहुँची रंगमंच को नई पहचान दिलाने का श्रेय रविकांत सिंह जैसे उभरते कलाकारों को जाता है। जिनके प्रयासों से रंगमंच आज वापस अपनी जड़ों की ओर लौट पड़ा है…

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      नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार में जब -जब रंगमंच और नाटकों की बात होगी तब-तब कला-रंगमंच के समर्पित एक बहुत ही प्रतिभावान कलाकार-निर्देशक का नाम स्पष्ट और सुंदर लिपि में अंकित मिलेगा।

      बिहार में हाशिए पर पहुँची कला को जीवंता प्रदान करने वाले बहुत कम लोग बचें हैं। बिहार के कुछ ऐसे ही प्रतिभाशाली कलाकारों में जो एक चहेता नाम है युवा रंगकर्मी रविकांत सिंह का।Ministry of Culture selected Ravikant Singh actor of Chandi from Nalanda for fellowship 2

      नालंदा जिले के चंडी प्रखंड के मुबारकपुर निवासी स्वतंत्रता सेनानी बिन्दा सिंह के होनहार पुत्र रविकांत सिंह का चयन‌ संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में बिहार से अकेले जूनियर फेलोशिप श्रेणी में हुआ है।

      उन्हें 2019-20 सत्र के लिए चुना गया है। संस्कृति मंत्रालय हर साल कला, संस्कृति के क्षेत्र में शोध‌‌ के लिए फेलोशिप के लिए चयन करती है।रविकांत सिंह “वर्तमान समय में रंगमंच भाषा में अंतर्दृष्टि” बिषय पर शोध करेंगे।

      रंगमंच की दुनिया में अपनी प्रतिभा को एक नई पहचान देने वाले सौम्य,सरल और जहीन व्यक्तित्व के धनी रविकांत सिंह की नाटक और अभिनय क्षमता समकालीन समाज का आईना होने के साथ -साथ परंपरागत और आधुनिक नाटकों के बीच का सेतु भी बनाते हैं।

      अपने अभिनय से व्यवस्था के खिलाफ, समाज के हताश, निराश तबके के जीवन में आशा का संचार करने की परिकल्पना कलाकार रविकांत सिंह का अपना अलहदा अंदाज रहा है।बिहार तथा देश के कई नामी-गिरामी कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं।

      चंडी प्रखंड के एक छोटे से गांव मुबारकपुर से  एक छोरा बीए करने के बाद आईएस बनने का सपना लिए घर से देश की राजधानी दिल्ली पढ़ाई के लिए निकलता है। लेकिन बचपन से उनके दिलों दिमाग पर एक्टिंग का भूत सवार था।

      गाँव -जेवार में दशहरा के अवसर पर होने वाले नाटकों में उनके अभिनय कौशल देखते बनता था। जब पढ़ाई करने के दिन थे, तभी से उनके अंदर अभिनय का शौक पैदा हो चुका था। अभिनय ही उनका जुनून था।उसी जुनून का यह परिणाम है कि वह रंगमंच के क्षितिज का एक सितारा बन गए हैं।Ministry of Culture selected Ravikant Singh actor of Chandi from Nalanda for fellowship 22

      माता-पिता ने बड़े शौक से बेटे को दिल्ली आईएएस की पढ़ाई के लिए भेजा था। लेकिन बेटे के दिल में कुछ और चल रहा था। आईएएस बनने का विचार छोड़ उन्होंने एक्टिंग क्लास ज्वाइंन कर ली। साथ ही दिल्ली में ही अभिनय कला को जारी रखा।

      नालंदा जिले के चंडी प्रखंड के मुबारकपुर गाँव के स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मुखिया बिंदा सिंह के होनहार पुत्र रविकांत सिंह आज किसी परिचय के मुहताज नहीं है।

      भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित रविकांत सिंह ने हॉरर फिल्म ‘द जिंक्स’ तथा ‘डेथ ऑन संडे’ फिल्म में अपने अभिनय क्षमता से लोहा मनवा चुके हैं।

      साथ ही बिहार सरकार के लिए सामाजिक संदेश देने वाले विज्ञापन “मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना “के लिए अभिनेता राजेश कुमार के साथ विज्ञापन में भी नजर आ चुके हैं।

      इसके अलावा राज्य सरकार के द्वारा कई एड में भी टीवी पर नजर आ चुके हैं।रंगमंच के विभिन्न माध्यमों के लिए काम भी कर रहे हैं।

      रंगमंच के इस कलाकार ने अब तक कई दर्जन नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए भिखारी ठाकुर सम्मान मिल चुका है। साथ 24 वें पटना पुस्तक मेला में पटना प्रक्षेत्र के आयुक्त रहे आनंद किशोर के हाथों भी सम्मानित हो चुके है।Ministry of Culture selected Ravikant Singh actor of Chandi from Nalanda for fellowship

      2006 में रविकांत सिंह नाट्य संस्था इप्टा से जुड़े और उन्होंने एक महीने का थियेटर वर्कशॉप भी किया। 2007 में श्री राम सेंटर द्वारा अभिनय कोर्स और 2008 में एनएसडी द्वारा थियेटर वर्कशॉप पटना में विभिन्न ग्रुप के साथ रंगमंच किया। इन्होंने इप्टा के अलावा मंच,राग, प्रेरणा, रंगमाटी में भी काम किया।

      इनके द्वारा अभिनीत नाटकों में ‘दस दिन का अनशन’, ‘महुआ’, ‘रक्त कल्याण’, ‘साला मैं तो साहब बन गया’, ‘कबीरा खड़ा बाजार में’, ‘तीसरा गवाह’, ‘मैं बिहार हूँ’, ‘मुझे कहाँ लें आए हो कोलबंस’, ‘उमराव जान’,’ये जनपथ’ जैसे कई नाटक शामिल है।

      भीष्म साहनी के नाटक ‘कबीरा खड़ा बाजार में’ तनवीर अख्तर के निर्देशन में उन्होंने अभिनय की छाप छोड़ी। उन्होंने टेलीफिल्म ‘ललका गुलाब’ में लीड रोल किया।

      रविकांत सिंह ने यूनिसेफ के लिए डोको ड्रामा,वर्ष 2009 में भारत रंग महोत्सव में उमराव जान नाटक में स्वयं अभिनय भी किया।

      इसके अलावा दिल्ली तथा भोपाल में बिहार सरकार के लोकगाथा उत्सव में हिरनी बिरनी टीम का निर्देशन भी किया।2014-15में कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बिहार सरकार की और से उन्हें भिखारी ठाकुर युवा भी सम्मान मिला।

      Ministry of Culture selected Ravikant Singh actor of Chandi from Nalanda for fellowship 1युवा रंगकर्मी रविकांत सिंह आज बिहार में ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में एक सम्मानित रंगकर्मी, कलाकार के रूप में जाने जाते हैं। उनकी एक अलग पहचान है।

      गाँव जेवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले रविकांत सिंह के पिता बिंदा सिंह स्वतंत्रता सेनानी के अलावा मुखिया भी रह चुके हैं।

      इनके एक भाई मणिकांत मनीष अपने पंचायत के मुखिया है जबकि भतीजा शशिकांत कौशल भी पिछले दस सालों से पैक्स अध्यक्ष हैं। बाकी अन्य भाई खेती और बिजनेस में है।आठ भाइयों में सातवें नंबर पर रविकांत सिंह हैं।

      उनकी आने वाली अभिनित फिल्म “लिपिस्टिक ब्याय’ है। जिसके प्रोड्यूसर दीपक सावंत हैं। इसके अलावा रवि हरिशंकर परसाई के नाटकों पर एक सोलो प्ले लेकर आ रहे हैं। इनके कई धारावाहिक डीडी बिहार और दूरदर्शन पर भी प्रसारित हो चुका है।

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