Thursday, February 12, 2026
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    52 साल का हुआ नालंदा, जानें कब और क्यों बना था यह नया जिला

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जो कभी पटना जिले का हिस्सा हुआ करता था। आज एक समृद्ध जिला बन चुका है। 1976 में नालंदा एक स्वतंत्र जिला के रूप में स्थापित किया गया और तब से लेकर अब तक नालंदा ने विकास के कई मील के पत्थर छुए हैं। विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में जिले ने जबरदस्त उन्नति की है। जब नालंदा पटना के अधीन था। तब जिले में एक भी आईटीआई या तकनीकी शिक्षा संस्थान नहीं था।

    लेकिन आज नालंदा में चार आईटीआई, अस्थावां पॉलिटेक्निक कॉलेज, चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज, विम्स पावापुरी मेडिकल कॉलेज, नालंदा विश्वविद्यालय, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी और रहुई में डेंटल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं। ये सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संस्थान हैं। जो नालंदा को शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी जिले के रूप में स्थापित करते हैं।

    आज नालंदा जिले में तीन राष्ट्रीय मार्ग हैं और गांव-गांव तक पक्की सड़कें बन चुकी हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में विकास का एक नया युग शुरू हुआ है। जिले के हर घर तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है। इससे जीवन स्तर में सुधार हुआ है और विकास की गति तेज हुई है।

    औद्योगिक क्षेत्र में भी नालंदा पीछे नहीं है। जिले में दो एथेनॉल फैक्ट्रियों, चार राइस मिल, 21 अंडा उत्पादन फॉर्म और नालंदा डेयरी ने आर्थिक विकास को नई दिशा दी है। इसके अलावा जू सफारी और नेचर सफारी जैसे पर्यटन स्थलों ने नालंदा को एक महत्वपूर्ण पर्यटक केंद्र बना दिया है। राजगीर का घोड़ा कटोरा भी जिले की शान में चार चांद लगा रहा है।

    नालंदा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वः नालंदा जिला सिर्फ आधुनिक विकास के लिए नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में नालंदा शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और यहां बौद्ध धर्म का बड़ा प्रभाव था।

    चीनी तीर्थयात्री ह्वेन त्सांग और यिजिंग ने नालंदा की महानता का वर्णन किया है। गुप्त राजाओं और राजा हर्षवर्धन ने इसे संरक्षण दिया। जिससे यह एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र के रूप में उभरा।

    आज नालंदा के इतिहास की यह विरासत नालंदा विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के रूप में जीवित है। जो न केवल देश, बल्कि दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं।

    भौगोलिक और जनसांख्यिकी विवरणः नालंदा जिला 2,355 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 1.64 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। यह जिला उत्तर और उत्तर-पूर्व में पटना, दक्षिण में नवादा, दक्षिण-पूर्व में शेखपुरा और पश्चिम में जहानाबाद और गया जिलों से घिरा हुआ है।

    नालंदा जिले की जनसंख्या 2021 की जनगणना के अनुसार 28,77,653 है। जिसमें 14,97,060 पुरुष और 13,80,593 महिलाएं शामिल हैं। जिले का लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 949 महिलाओं का है। नालंदा की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है। इससे साफ है कि यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    52 साल का सफर, नालंदा का भविष्यः नालंदा ने अपनी स्थापना के बाद से शिक्षा, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में जो प्रगति की है। वह काबिल-ए-तारीफ है। आने वाले समय में नालंदा अपने ऐतिहासिक गौरव और आधुनिक विकास के संयोजन के साथ और भी ऊंचाइयों को छूने की ओर अग्रसर है।

    नालंदा का यह 52 साल का सफर यह बताता है कि कैसे यह जिला शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर के साथ आधुनिकता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और भविष्य में भी यह विकास की कहानी लिखता रहेगा।

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    नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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