बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार ने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और शिक्षकों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए ई-शिक्षा कोष ऐप को अनिवार्य कर दिया है। इस ऐप के जरिए अब शिक्षकों की हाजिरी स्कूल से 500 मीटर के दायरे में ही दर्ज की जा सकती है। इससे कोई भी गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो गई है। यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति और वेतन भुगतान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सही बनाने के लिए उठाया गया है।
कैसे काम करता है ई-शिक्षा कोष ऐप? जब शिक्षक इस ऐप को लॉगिन करते हैं, तो ऐप अपने आप मोबाइल के सेल्फी मोड को सक्रिय कर देता है। सबसे पहले शिक्षक को अपनी एक तस्वीर लेनी होती है। जिससे डेट और टाइम अपने आप सेट हो जाता है। यह उपस्थिति केवल स्कूल परिसर के 500 मीटर के दायरे में ही मान्य होगी।
शिक्षक को स्कूल छोड़ने के समय भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। जहां शिक्षक को फिर से अपनी फोटो लेकर ऐप में लॉग आउट करना होता है। इस पूरी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि शिक्षक स्कूल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएं और किसी तरह की गड़बड़ी या धोखाधड़ी न कर सकें।
ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर होगा वेतन भुगतानः बिहार में 1 अक्टूबर से शिक्षकों के वेतन का भुगतान ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर किया जा रहा है। शिक्षकों को अब हर दिन अपनी उपस्थिति ई-शिक्षा कोष ऐप पर दर्ज करनी होती है और यह डाटा शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जाता है।
उसके आधार पर ही शिक्षकों को उनके काम के दिनों के हिसाब से वेतन का भुगतान किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से उपस्थिति की अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जिससे वेतन में कटौती या अनुचित भुगतान जैसी समस्याएं दूर होंगी।
क्या होगा अगर नेटवर्क या सर्वर में आए समस्या? यदि किसी दिन सर्वर या नेटवर्क में समस्या आ जाती है तो शिक्षकों के लिए मैनुअल अटेंडेंस की भी सुविधा दी गई है। ऐसी स्थिति में प्रिंसिपल या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को इसकी जानकारी देनी होगी। ताकि शिक्षकों की उपस्थिति को मैन्युअली मान्यता दी जा सके। यह उपाय इसलिए किया गया है, ताकि शिक्षकों को किसी तकनीकी समस्या के कारण वेतन में कटौती का सामना न करना पड़े।
पारदर्शिता और अनुशासन की ओर बड़ा कदमः ई-शिक्षा कोष ऐप का उपयोग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन लाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे न केवल शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि वेतन प्रक्रिया को भी अधिक सुगम और सही तरीके से लागू किया जा सकेगा।
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Govt. Vidyalay ka udeshya hona chahiye achi gunwatta ki padhai. Sikshak ka ohda sarvopari hota h. Sirf naukri dene ki nautanki krne k liye bhed bakrion ko teacher bana kr zabardasti samay pe vidyalay pahochne aur nikalne se unko padhane nahi aa jayega. Sikshak ka recruitment me student feedback ka bhi role hona chahiye.